भिण्ड, 03 मार्च। नगर परिषद मेहगांव द्वारा 20 फरवरी को जारी साधारण सम्मेलन की सूचना के बावजूद सोमवार को निर्धारित बैठक स्थगित हो गई। अध्यक्ष कंचन पिंटू राठौर के आदेश पर 2 मार्च दोपहर 2 बजे नगर परिषद हॉल में होने वाली इस बैठक में विकास कार्यों और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी थी। लेकिन अज्ञात कारणों से अध्यक्ष की अनुपस्थिति के चलते बैठक आगामी तिथि तक टाल दी गई।
पार्षदों का आरोप है कि अध्यक्ष को बहुमत का समर्थन नहीं मिला, इसलिए उन्होंने बीमारी का बहाना बनाया। वहीं नगर परिषद के सीएमओ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है। वार्ड क्रमांक 2 के पार्षद राकेश चौधरी ने बताया कि आज की मीटिंग में अध्यक्ष को पार्षदों का बहुमत नहीं मिला। हम सभी विकास कार्यों और अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार थे, लेकिन पार्षद अध्यक्ष के विरोध में खड़े हो गए। इसलिए उन्होंने बीमारी का बहाना बनाकर आने से मना कर दिया। यह नगर हित के खिलाफ है। चौधरी ने कहा कि बैठक स्थगित होने से शहर के कई लंबित प्रोजेक्ट रुके हुए हैं। पार्षदों की नाराजगी चरम पर है और वे आगामी बैठक में जवाब मांगेंगे।
सीएमओ का स्पष्टीकरण
नगर परिषद के सीएमओ महेश पुरोहित ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अध्यक्ष अस्वस्थ होने के कारण बैठक में उपस्थित नहीं हो सकीं। इसलिए मीटिंग को आगामी तिथि तक स्थगित करना पड़ा। यह निर्णय अध्यक्ष के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लिया गया है। सीएमओ ने बताया कि नई तिथि जल्द घोषित की जाएगी और सभी पार्षदों को सूचित किया जाएगा। उन्होंने पार्षदों से अपील की कि वे धैर्य रखें और नगर विकास के लिए एकजुट हों।
विकास कार्यों पर चर्चा रुकी
20 फरवरी को जारी पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि अध्यक्ष के आदेशानुसार साधारण सम्मेलन 2 मार्च को दोपहर 2 बजे हॉल में होगा। एजेंडे में गौरव दिवस मनाऐ जाने, निर्माण कार्यों के पुनरीक्षित प्राक्कलन, व्यवस्थित यात्री प्रतीक्षालय बनाए जाने, पुराना बस स्टैण्ड, मोती माता मन्दिर तिराहा, हाट बाजार पचैरा रोड तिराहा आकर्षक सौन्दर्यीकरण निर्माण जैसे कई विकास कार्य शामिल थे। साथ ही बजट आवंटन और पार्षदों के सुझावों पर विचार होना था। स्थगन से इन मुद्दों पर फैसला रुका हुआ है, जिससे स्थानीय निवासियों में असंतोष बढ़ रहा है। मेहगांव जैसे छोटे शहर में ऐसी बैठकें महत्वपूर्ण होती हैं, जहां पार्षद सीधे जनसमस्याओं को उठाते हैं।
पार्षदों में फूट की आशंका
नगर परिषद में अध्यक्ष के खिलाफ असंतोष लंबे समय से चल रहा है। पार्षदों का एक धड़ा विकास कार्यों में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगा रहा है। इस घटना ने इस विवाद को और हवा दे दी है। राकेश चौधरी जैसे पार्षद खुलेआम बयान दे रहे हैं, जबकि सीएमओ का वर्जन स्वास्थ्य पर केंद्रित है। क्या यह महज स्वास्थ्य समस्या है या राजनीतिक रणनीति सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द नई बैठक हो और मुद्दे सुलझें।
Thursday, October 1
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