भिण्ड, 27 नवम्बर। संत के आसपास सकारात्मक ऊर्जा रहती है क्योंकि संत भगवान को हृदय में धारण करके चलते हैं। इसीलिए संत जहां भी दिखाई देते हैं तो मनुष्य राधे-राधे और राम-राम जरूर बोलते हैं। यह उद्गार हनुमान जी सेंथिया धाम दुर्गा नगर भिण्ड में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ में चौथे दिन प्रवचन करते हुए कथा वाचक आचार्य विनयकांत त्रिपाठी ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि इस संसार में मनुष्य झूठ बोलकर दूसरे मनुष्य को धोखा देकर अपने बच्चों के लिए पैसा कमाते हैं, इस तरह वह पैसा नहीं बल्कि पाप कमाते हैं। जो पैसा आप अपने बच्चों के लिए कमाते हैं वह पैसा ईमानदारी से कमाओ क्योंकि बच्चे पैसों को तो आपस में बांट लेंगे लेकिन वह उस पाप को नहीं बाटेंगे। उन्होंने कहा कि संत को कभी छोटा बड़ा नहीं समझना चाहिए संत तो संत होते हैं संत तो बहुत बड़े महात्मा होते हैं। इस मौके पर मंहत सत्यनारायण दास महाराज सेंथिया धाम, भगवानदास सेंथिया, नरेश चौधरी, करू मिश्रा, रामनरेश शर्मा, कमलदास महाराज, अजयदास पुजारी, जलज त्रिपाठी, शिवम सेंथिया, संतोष प्रसाद शर्मा सहित श्रद्धालु मौजूद रहे।
Sunday, April 5
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