भिण्ड। घर-घर गीता का प्रचार हो जन अभियान के अंतर्गत कुलदीप सिंह राजावत के पिताजी की पुण्यतिथि के अवसर पर विश्व गीता प्रतिष्ठानम के गीता स्वाध्याय मण्डल भिण्ड द्वारा कुशवाह कॉलोनी स्थित मन महेश्वर मन्दिर में गीता स्वाध्याय किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य यजमान कुलदीप सिंह राजावत ने भगवान श्रीकृष्ण के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया। स्वाध्याय पत्र का वाचन एवं सुभाषित की प्रस्तुति जिला संयोजक विष्णु कुमार शर्मा ने दी। अमृत वचन एवं प्रेरक प्रसंग का वाचन दुर्गादत्त शर्मा ने किया, जिसमें उन्होंने सदाचारण पर विशेष बल दिया।
मुख्य वक्ता रघुराज दैपुरिया ने सैद्धांतिक शब्दों का लक्ष्य कराते हुए भगवान, अवतार और जगतगुरु तीनों का यथार्थ लक्ष्य कराया, कतिपय लोग समानार्थी समझ बैठते हैं, षट भग धारण करने वाला भगवान विभूति, अवतार विशेष विभूति षट भग देय की कुशलता अवतारों में रहती है, जो सारे जगत को नर के माध्यम से प्रत्यक्ष ज्ञान (विज्ञान) देने की सामर्थ्य रखता है, समझाया। गीता के सातवे अध्याय के 11वें श्लोक तक में लक्ष्यार्थ कराते हुए परमात्म दर्शन पूर्ण रीति से कैसे होगा इन श्लोकों में भगवान ने यही बताया है, फिर कुछ जानना शेष नहीं रहेगा, वेदों (श्रुति) के नेत-नेत शेष भी प्रत्यक्ष साक्षात्कार कराया है। सभी उपनिषदों का सार दूध, दूध का सार घी श्रुतियों से निकालकर बछड़े रूप अर्जुन को पिलाया है।
गीता के प्रथम अध्याय का सार प्रस्तुत करते हुए ज्ञानेन्द्र सिंह ने कहा कि गीता दो मित्रों का संवाद है और महाभारत का अंश है, गीता के प्रथम अध्याय का नाम अर्जुन विषाद योग है। इसका एक महत्वपूर्ण प्रयोजन है कि अर्जुन को विषाद क्यों हुआ, जबकि पूर्व में विराट युद्ध में अर्जुन कौरवों को परास्त कर चुका था, धृतराष्ट्र ने संजय को पांडवों के शिविर में युद्ध से पूर्व भेजा और संजय ने पांडवों से विशेष कर युधिष्ठिर और अर्जुन वही बातें कीं जो अर्जुन पविषाद युक्त होकर प्रथम अध्याय में कह रहा है। धृतराष्ट्र के पूछने पर कि मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया, संजय ने प्रथम अध्याय में उसका वर्णन किया। भगवान अर्जुन के रथ को दोनों सेनाओं के बीच ले गए और अर्जुन दोनों सेनाओं में अपने परिजनों को देखकर और उन्हें मारना पड़ेगा। यह सोचकर विषाद ग्रस्त हो गया, आया था युद्ध करने और शोक ग्रस्त होकर शस्त्र फेंक कर बैठ गया, भगवान ने उसे शोक से दूर रहने के लिए डाटा और उपदेश दिया। प्रथम अध्याय में ही सारे कौरव और पांडव वीरों का वर्णन है, इसलिए प्रथम अध्याय का अवश्य ही अध्ययन करना चाहिए। मां गीता की आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर मुलायम सिंह चौहान, कुलदीप सिंह राजावत, महेन्द्र बाबू तिवारी, राजीव शर्मा, शिवनाथ सिंह, शैलेश सक्सेना, रामआसरे शर्मा, अमित चौधरी, उदयभान सिंह, कृष्णअवतार पाराशर, राजेन्द्र सिंह भदौरिया, अर्पित राजावत, दिनेश सिंह भदौरिया, बलदेव शर्मा, रेखा श्रीवास्तव, राधा कुशवाह आदि उपस्थित रहे।
Sunday, September 27
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