– ऑस्टिन इंटर नेशनल स्कूल में विद्यार्थियों ने समझा ओजोन संरक्षण और क्लाइमेट एक्शन का महत्व
भिण्ड। विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर सुप्रयास द्वारा ऑस्टिन इंटर नेशनल स्कूल में पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। वर्ष 2026 की थीम ‘ग्लोबल एक्शन फॉर ए कूलर प्लैनेटÓ को केन्द्र में रखकर आयोजित कार्यक्रम में ओजोन परत के संरक्षण, पर्यावरण-अनुकूल कूूलिंग, ऊर्जा दक्षता और क्लाइमेट एक्शन पर विद्यार्थियों के साथ संवाद किया गया।
मुख्य वक्ता प्रो. इकबाल अली ने कहा कि ओजोन परत पृथ्वी का ऐसा अदृश्य सुरक्षा कवच है, जो सूर्य की हानिकारक अल्ट्रा वायलेट किरणों से जीवन की रक्षा करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि ओजोन संरक्षण की लड़ाई केवल वैज्ञानिकों या सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली और उपभोग की आदतें भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम का विषय-प्रतिपादन सुप्रयास के सचिव डॉ. मनोज जैन ने किया। उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में ओजोन परत के सामने खड़ा हुआ संकट मानवता के लिए एक गंभीर चेतावनी था, लेकिन मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने यह प्रमाणित किया कि दुनिया यदि किसी पर्यावरणीय चुनौती पर एकजुट होकर कार्रवाई करे तो सकारात्मक परिणाम संभव हैं। वर्ष 2016 का किगाली अमेंडमेंट अब ओजोन संरक्षण को क्लाइमेट एक्शन के साथ जोड़ता है। उन्होंने कहा कि आज हमारे सामने प्रश्न केवल यह नहीं है कि ओजोन परत बच रही है या नहीं, बल्कि यह भी है कि हम कूलिंग की बढ़ती जरूरत को किस तरह पर्यावरण के अनुकूल बनाते हैं। एसी और रेफ्रिजरेटर जैसी सुविधाएं हमारी जरूरत बन चुकी हैं, लेकिन ऊर्जा की बचत, पर्यावरण-अनुकूल तकनीक और जिम्मेदार उपयोग को हमारी आदत बनाना होगा।
कार्यक्रम में सुलेखा, अभिषेक भारद्वाज तथा रणजीत सिंह चौहान ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया और पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही। अंशिका भदौरिया, दिव्या जैन और अर्जुन सिंह ने ओजोन संरक्षण तथा पर्यावरण विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों के सवालों और प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट हुआ कि नई पीढ़ी पर्यावरणीय समस्याओं को केवल पाठ्यक्रम के विषय के रूप में नहीं, बल्कि अपने भविष्य से जुड़े प्रश्न के रूप में देख रही है।
अंत में ऑस्टिन इंटरनेशनल स्कूल के संचालक शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना विकसित करने के लिए ऐसे संवादों की आवश्यकता पर बल दिया।
एसडीजी से जुड़ा संदेश
यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के एसडीजी-13 : क्लाइमेट एक्शन, एसडीजी-12 : रिस्पॉन्सिबल कंजम्पशन एंड प्रोडक्शन, एसडीजी-4 : क्वालिटी एजुकेशन तथा एसडीजी-3 : गुड हेल्थ एंड वेल-बीइंग से सीधे जुड़ा रहा। सुप्रयास और ऑस्टिन इंटर नेशनल स्कूल की यह साझेदारी एसडीजी-17 : पार्टनरशिप्स फॉर द गोल्स की भावना को भी मजबूत करती है।
विश्व ओजोन दिवस का संदेश
इस कार्यक्रम में एक सरल सवाल के रूप में सामने आया कि क्या हमें केवल अपने घरों को ठंडा करना है या अपनी धरती को भी ठंडा रखना है? सुप्रयास का प्रयास है कि ऐसे संवादों के माध्यम से विद्यार्थी पर्यावरण के दर्शक नहीं, बल्कि क्लाइमेट एक्शन के सहभागी बनें।


