भिण्ड, 26 मार्च। नवरात्रि के उपलक्ष्य में रावतपुरा धाम में आयोजित की जा रही सात दिवसीय भागवत कथा का गुरुवार को सुदामा चरित्र की कथा के साथ समापन हो गया।
सातवें दिन कथा व्यास अंकित पचौरी महाराज ने सुदामा चरित्र का वर्णन किया, जिसको सुनकर श्रद्घालु भावविभोर हो गए। उन्होंने कहा कि सुदामा चरित्र अत्यन्त स्वाभाविक, हृदयग्राही, सरल एवं भावपूर्ण कथा है। इसमें एक ही गुरु के यहां अध्ययन करने वाले दो गुरु-भाइयों, सुदामा और श्रीकृष्ण की आदर्श मैत्री का चित्रण किया गया है। सुदामा संसार में सबसे अनोखे भक्त रहे हैं। वह जीवन में जितने गरीब नजर आए, उतने ही वह मन से धनवान थे। उन्होंने अपने सुख व दुखों को भगवान की इच्छा पर सौंप दिया था।
अंकित पचौरी ने कहा कि जब सुदामा भगवान श्रीकृष्ण ने मिलने आए तो उन्होंने सुदामा के फटे कपड़े नहीं देखे, बल्कि मित्र की भावनाओं को देखा। मनुष्य को अपना कर्म नहीं भूलना चाहिए। अगर सच्चा मित्र है तो श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होना चाहिए। जीवन में मनुष्य को श्रीकृष्ण की तरह अपनी मित्रता निभानी चाहिए। कथा में महिलाओं ने भजन कीर्तन किए। कथा सुनने आए श्रद्धालुओं ने भक्ति रस का पान किया। इस मौके पर रावतपुरा धाम के महंत रविशंकर महाराज समेत सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
Tuesday, September 29
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