– विधायक देसाई एवं पूर्व मंत्री आर्य ने जुलूस को दिखाई हरी झण्डी
भिण्ड, 22 मार्च। गोहद नगर में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में भगवान पारसनाथ का जन्म कल्याणक धूमधाम से मनाया गया। इसके साथ ही तीन हाथी, 15 बग्घी, तीन बैंड, ढोल ताशे आदि के साथ जन्म का उत्सव मनाते हुए जुलूस निकाला गया, जो कार्यक्रम स्थल काशी बनारस महर्षि अरविद महाविद्यालय गोहद से शुरू होकर नगर के मुख्य मार्गों से घूमते हुए पुन: कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे एवं गरबा नृत्य तथा डांडिया नृत्य करते हुए पूरे नगर में खुशी का माहौल बन गया। जुलूस का शुभारंभ विधायक केशव देसाई एवं पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य ने हरी झण्डी दिखाकर किया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी शामिल हुए।
पंच कल्याणक महोत्सव में भगवान पार्श्वनाथ ने 10 जन्मों तक प्रतिशोध की भावना से मुक्त होकर तपस्या की। उनके जन्म से पहले वे 13वें स्वर्ग में इन्द्र के रूप में थे और पूर्व जन्म में वे ‘मरुभूतिÓ नाम के जीव थे, जिन्होंने कामथ (उनके वैरी) को क्षमा किया, वाराणसी में राजा अश्वसेन के महल में पौष कृष्ण एकादशी को भगवान का जन्म हुआ। उनके शरीर पर सर्प का चिन्ह था। कहा जाता है कि उनके जन्म के समय इन्द्रों के सिंहासन कांप उठे थे और वे जन्म-कल्याणक का जश्न मनाने के लिए पृथ्वी पर आए। उनके जन्म के समय माता वामा ने सपने में एक काला सर्प (पार्श्व) देखा था, इसलिए उनका नाम पार्श्व रखा गया।
प्रारंभिक जीवन और वैराग्य
बचपन से ही पार्श्वनाथ का झुकाव अध्यात्म की ओर था। 16 वर्ष की आयु में जब उनके पिता ने विवाह करने के लिए कहा, तो उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया और ध्यान करना शुरू कर दिया, क्योंकि वे जानते थे कि आत्मा ही उसकी एकमात्र मित्र है। एक बार उन्होंने एक तपस्वी की अग्नि में फंसे दो सांपों को बचाया था, जो बाद में धरणेंद्र और पद्मावती के रूप में जाने गए। भगवान पार्श्वनाथ ने काशी में अपने तीन कल्याणक (गर्भ, जन्म, और दीक्षा) को पूरा किया।


