भिण्ड, 21 मार्च। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के गर्भ कल्याणक का पावन प्रसंग अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान के गर्भावतरण की दिव्य कथा का श्रवण कर पुण्य अर्जित किया।
कथा के अनुसार जब वाराणसी के राजा अश्वसेन और रानी वामा देवी के गर्भ में भगवान पार्श्वनाथ का अवतरण हुआ, तब समस्त वातावरण मंगलमय हो उठा। चैत्र माह में हुए इस दिव्य अवतरण के समय रानी वामा देवी ने 16 शुभ स्वप्न देखे, जो एक तीर्थंकर के आगमन का संकेत माने जाते हैं। गर्भ कल्याणक के दौरान अद्भुत चमत्कार भी देखने को मिले। कहा जाता है कि भगवान के गर्भ में आने के छह माह पूर्व से ही कुबेर द्वारा प्रतिदिन वाराणसी नगरी में साढ़े तीन करोड़ रत्नों की वर्षा की गई, जिससे नगर में समृद्धि और उल्लास का वातावरण बन गया। इसके साथ ही देवराज इन्द्र सहित अनेक देव-देवियां स्वर्ग से उतरकर इस दिव्य अवसर के साक्षी बने और गर्भ कल्याणक उत्सव को भव्य रूप से मनाया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के जीवन प्रसंगों को सुनकर आत्मकल्याण का मार्ग अपनाने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में भक्ति, आस्था और उल्लास का माहौल देखने को मिला।
अष्ट कुमारियों ने की माता की सेवा
कार्यक्रम के दौरान अष्टकुमारियों ने पारस कुमार की माता वामा देवी की पास कुमार की गर्भ में आने का समाचार सुनते ही सेवा सत्कार किया एवं माता से धर्म चर्चा की।
इन्द्राणियों एवं सभी महिलाओं ने की गोद भराई
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में गर्भ कल्याणक, जन्मकल्याणक तप कल्याणक, ज्ञान कल्याणक तथा मोक्ष कल्याणक मनाए जाते हैं। पहले दिन गर्भ कल्याणक मनाया जाता है। जब भगवान का जीव माता के गर्भ में आता है, इस दौरान 16 संस्कारों में सीमांत संस्कार मनाया जाता है, इस दौरान शनिवार को 3 बजे से भगवान के माता-पिता को गाजियाबाद के साथ एवं बैण्ड बाजा के साथ कार्यक्रम स्थल पर लाया गया। इस दौरान इन्द्राणियों एवं कार्यक्रम में मौजूद सभी महिलाओं ने माता की गोद भराई की।
Tuesday, April 7
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