– कांग्रेस ने महिलाओं के सम्मान और संविधान की हमेशा रक्षा की है : बघेल
भिण्ड, 22 जनवरी.मनीष दुबे। ग्रामीण कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामशेष बघेल एवं रिटायर्ड डीएसपी सुरेन्द्र सिंह तोमर ने गोहद में संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि विधायक फूलसिंह बरैया के हालिया वक्तव्य को लेकर जिस प्रकार महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध अर्थ निकाल कर भ्रम और शंकाएं खड़ी की जा रही हैं, वह न केवल तथ्यहीन है, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ी मूल बहस को भटकाने वाला भी है। वास्तविकता यह है कि विधायक बरैया द्वारा कही गई बातें महिलाओं के सम्मान की रक्षा और जातिगत शोषण को उजागर करने के संदर्भ सामाजिक सच्चाई है कि भारत में कुछ प्राचीन व अर्थ-प्राचीन ग्रंथों/ किताबों में शूद्र, एससी, एसटी, ओबीसी और मोस्ट ओबीसी वर्गों को सेवक या दास मानकर उनके शोषण को वैध ठहराने वाली में लिखी गई है। दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि ऐसी पुस्तकें आज भी प्रतिबंधित नहीं हैं, बल्कि प्रचलन में हैं। इन्ही पुस्तकों की सामग्री वह मानसिकता गढ़ती है जिसके सहारे जातिगत अपराधों को जायज ठहराने की कोशिश की जाती है।
इसी संदर्भ में विधायक फूलसिंह बरैया ने उन आपतिजनक पंक्तियों की ओर ध्यान दिलाया था, जो महिलाओं और वंचित वर्गों के अपमान व शोषण को बढ़ावा देती हैं। यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि दोष वक्तव्य का नहीं, बल्कि उन पुस्तकों, उनके लेखकों-प्रकाशकों और उस शासन व्यवस्था का है, जो आज भी ऐसे साहित्य पर कठोर कार्रवाई करने में विफल रही है। संविधान और बाबा साहेब का अपमान गंभीर चिंता आज देश में भारत रत्न, संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का निरंतर अपमान मूर्तियां तोड़ना, तस्वीरें जलाना, संविधान और लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार-एक दुखद वास्तविकता बन चुका है। न्यायपालिका में शीर्ष पदों पर बैठे व्यक्तियों के अपमान की घटनाएं, जातिगत भेदभाव से प्रताड़ित अधिकारियों की आत्म हत्याएं, दलित-आदिवासी समाज पर अमानवीय अत्याचार- ये सभी मानव गरिमा के लिए गंभीर चेतावनी हैं। महिलाओं के विरुद्ध अपराध, अपहरण, मानव तस्करी, बलात्कार और सामूहिक बलात्कार, बुजुर्ग महिलाओं को अपमानित करना, ये सब उसी विकृत सोच की उपज हैं, जिसे ऐसे ग्रंथ पोषित करते हैं।
जाति/वर्ण आधारित ऊंच-नीच, छुआछूत, महिलाओं के अपमान और शोषण को वैध ठहराने वाली सभी पुस्तकों पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। केन्द्र और राज्य सरकारें स्पष्ट आदेश जारी करें कि ऐसी सामग्री समाज में न फैले। साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाए कि ये पुस्तकें कब, किसने और क्यों लिखीं और इनके सामाजिक दुष्परिणामों की जिम्मेदारी किसकी है। संविधान निर्माता को लेकर स्थिति स्पष्ट संविधान निर्माता को लेकर उठाए गए अनावश्यक प्रश्नों पर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है। विधायी प्रक्रिया में ड्राफ्टिंग अधिकारियों द्वारा की जाती है, किंतु अंतिम संशोधन प्रस्तुति और संवैधानिक दायित्व निर्वहन का श्रेय उस नेतृत्व को मिलता है,जिसने उसे दिशा दी। संविधान के संदर्भ में यह ऐतिहासिक तथ्य निर्विवाद है कि ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष के रूप में डॉ. अंबेडकर ने ही संविधान को अंतिम स्वरूप दिया। वंचित वर्गों के अधिकार आरक्षण और सामाजिक न्याय के प्रावधान उनकी अद्वितीय दूरदर्शिता का प्रमाण हैं।
इसी मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा दिया गया वक्तव्य भी तथ्यपरक है। महिलाओं से संबंधित उद्धरण को विधायक बरैया ने स्वयं स्पष्ट कर दिया है कि वह एक दर्शनशास्त्र की पुस्तक से उद्धृत था, जिससे वे सहमत नहीं हैं। अत: विवाद का कोई औचित्य शेष नहीं रहता। उलटे, उस पुस्तक के लेखक के विरुद्ध कार्रवाई की मांग और अधिक प्रासंगिक हो जाती है। धार्मिक-सामाजिक विमर्श में यह भी स्मरणीय है कि संत परंपरा-संत कबीर, संत रविदास और भगवान बुद्ध-मानवता, समता और करुणा की पक्षधर रही है। वास्तविक सनातन विचारधारा पकृति-पूजक, भेदभाव- रहित और मानव गरिमा पर आधारित रही है। इसे किसी एक पंथ तक सीमित करना ऐतिहासिक रूप से भ्रामक है।
ग्रामीण कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामशेष बघेल ने कहा कहा कि भाजपा ने हमेशा महिलाओं को अपमानित करने का काम किया है, यहां तक कि देश जाबाज बेटी भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को भी अपमानित करने का काम किया और माफी तक नहीं नहीं मांगी और अभी भाजपा के मंत्री के कार्रवाई की गई, मंत्री विजय शाह, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय आदि आए दिन महिलाओं पर गलत टिप्पणी करते हैं जो कि बहुत ही गलत है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि बरैया के वक्तव्यों को तोड़-मरोड़कर नहीं, बल्कि उनके संदर्भ और सत्य के साथ समझा जाए। सत्य को सत्य और असत्य को असत्य कहने का साहस ही लोकतंत्र और समाज व्यवस्था को बचा सकता है। महिलाओं के सम्मान, संविधान की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए यह संघर्ष केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।
पूर्व डीएसपी सुरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि समाज को जातिगत नफरत और शोषण से मुक्त करने के लिए सत्य पर आधारित विमर्श और साहसिक निर्णय समय की आवश्यकता है। प्रेस वार्ता में पूर्व जनपद सदस्य देवीसिंह तोमर, वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिनेश शर्मा, समाजसेवी राजीव कांकर, पूर्व पार्षद सरदार संतोख सिंह पटेल, एडवोकेट गजेन्द्र सिंह गुर्जर, पूर्व जिला उपाध्यक्ष कांग्रेस जबर सिंह कुशवाहा, पूर्व जनपद सदस्य केदार सिंह कौशल, सुल्तान सिंह नरवरिया, नरेश सिंह तोमर, संतोष सिंह, देवेन्द्र निगम, जसवंत सिंह जादौन, राकेश सिंह जादौन, पूर्व पार्षद रामा वाल्मीकि, राघवेंद्र सिंह तोमर उर्फ राजू कक्का, सरदार अरविंदर सिंह पन्नू, रामजीलाल आदि कार्यकर्ता एवं समाजसेवी मौजूद रहे।


