भिण्ड, 27 नवम्बर। राष्ट्रीय संविधान दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शा. एमजेएस महाविद्यालय भिण्ड में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के तत्वाधान और भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के अंतर्गत महाविद्यालय प्राचार्य डॉ आरए शर्मा, प्रकोष्ठ प्रभारी प्रो. राजीव कुमार जैन और प्रो. मोहित कुमार दुबे के मार्गदर्शन व निर्देशन में किया गया।
सर्वप्रथम प्राचार्य डॉ. आरए शर्मा ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। तत्पश्चात बताया कि हमारा संविधान सिर्फ एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, यह एक ग्रंथ है, जो देश की आत्मा, उसके सपनों और उसके लोकतांत्रिक मूल्यों को दर्शाता है। इसलिए इस दिन को पूरे देश में संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। डॉ. केके रायपुरिया ने संविधान की प्रस्तावना का वाचन कर उसके महत्व को समझाया। प्रो. विनोद बिजोलिया ने बताया कि संविधान सभा में विविधता का प्रतिबिंब था। इसमें कुल 379 सदस्य थे, जिनमें 15 महिलाएं भी शामिल थीं। सरोजिनी नायडू, विजयलक्ष्मी पंडित, दुर्गाबाई देशमुख और हंसा मेहता जैसी महिला सदस्यों ने सक्रिय रूप से बहसों में भाग लिया और संविधान पर अपने हस्ताक्षर किए। यह उस समय की सामाजिक बनावट में एक क्रांतिकारी कदम था।
मंच संचालन करते हुए प्रो. राजीव कुमार जैन ने बताया कि भारत का संविधान किसी एक देश की नकल नहीं, बल्कि दुनिया भर के संविधानों के सर्वश्रेष्ठ सिद्धांतों का बेहद सोच-समझकर तैयार किया गया दस्तावेज है। इसमें ब्रिटेन से संसदीय शासन प्रणाली, अमेरिका से मौलिक अधिकार और जुडिशियल रिव्यू, आयरलैंड से राज्य के डायरेक्टिव प्रिंसिपल, कनाडा से संघीय ढांचा, जर्मनी से आपातकालीन प्रावधान और दक्षिण अफ्रीका से संविधान संशोधन की प्रक्रिया जैसे तत्व शामिल किए गए।
प्रो. मोहित कुमार दुबे ने बताया कि संविधान 26 नवंबर 1949 को तैयार हो गया था, लेकिन इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। इसके पीछे एक गहरा ऐतिहासिक महत्व था। 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की मांग की थी। इस ऐतिहासिक दिन को सम्मान देने के लिए ही 26 जनवरी का दिन’गणतंत्र दिवस के रूप में चुना गया। उन्होंने बताया कि संविधान एक स्थिर दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह समय के साथ विकसित होता रहता है। अब तक इसमें 100 से ज्यादा संशोधन हो चुके हैं, जो इसे बदलती हुई सामाजिक और आर्थिक जरूरतों के अनुरूप ढालते हैं। हालांकि, इसकी प्रस्तावना, जिसे संविधान की आत्मा कहा जाता है, को कभी भी बदला नहीं गया है। यह हम, भारत के लोग… से शुरू होकर देश के उद्देश्यों की घोषणा करती है।
अंत में विद्यार्थियों ने संविधान दिवस के अवसर पर प्रश्न मंच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें चार टीमों ने भाग लिया। प्रत्येक टीम से दो-दो राउण्ड में 10 प्रश्न पूछे गए। जिसमें टीम बी और टीम डी चुनी गई। टीम बी विजेता हुई। विजेता टीम बी में आशीष सोनी, संचिता पाराशर, श्रृष्टि यादव, सलोनी नरवरिया को महाविद्यालय स्टाफ ने बधाई दी। अंत में राष्ट्र गान जन गण मन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
Saturday, June 20
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