भिण्ड, 25 नवम्बर। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शा. एमजेएस महाविद्यालय भिण्ड में मंगलवार को सिख धर्म के नौवे गुरू तेगबहादुर के 350वे शहीदी दिवस के अवसर पर प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. आरए शर्मा ने गुरू तेगबहादुर के बलिदान दिवस पर बच्चों को सारगर्भित प्रबोधन दिया। उन्होंने कहा कि बोले सो निहाल सतश्री अकाल। भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ प्रभारी और रासेयो का उद्योग के प्रभारी प्रो. राजीव कुमार जैन ने सिख धर्म के नौवे गुरू तेगबहादुर के बलिदान दिवस के अवसर पर महाविद्यालय के विद्यार्थियों को सारगर्भित प्रबोधन देते हुए बताया कि किस प्रकार गुरु तेगबहादुर ने हिन्दुओं के धर्म और संस्कृति को औरंगजेब के अत्याचार से बचाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान तक कर दिया। औरंगजेब ने सिख गुरू तेगबहादुर सिंह को इस्लाम ना ग्रहण करने पर कठोर यातनाएं दी और अंत में उनका सिर कलम कर दिया। दिल्ली में जिस स्थान पर गुरू तेगबहादुर का शीश कलम किया गया, आज वह स्थान चांदनी चौक में शीशगंज गुरुद्वारा के रूप में जाना जाता है।
इतिहास विभाग की सहायक अध्यापक सुरभि बाथम ने गुरु तेगबहादुर के बलिदान दिवस पर अपने प्रबोधन में बताया कि उनके बचपन का नाम त्यागमल था और उनका जन्म अमृतसर में हुआ था। उनके पिता का नाम गुरु हरगोविंद जी और माता का नाम ननकी था। बचपन से ही इनमें देश व धर्म के प्रति समर्पण था तथा इन्होंने मानव कल्याण हेतु अनेक कार्य किया। वाणिज्य विभाग के सहायक अध्यापक डॉ. आशीष गुप्ता ने बताया कि गुरु तेग बहादुर ने अपने बलिदान द्वारा यह सिद्ध कर दिया है कि जब भी देश और धर्म पर संकट आएगा तो उसकी रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान भी करना पड़े तो भी कम है।
महाविद्यालय की बीए प्रथम वर्ष की छात्रा रोशनी बघेल ने गुरु तेगबहादुर जी के व्यक्तित्व पर सारगर्भित प्रबोधन देकर बताया कि किस प्रकार गुरु तेगबहादुरने मुगल बादशाह औरंगजेब के अत्याचारों से लड़ते हुए समाज, धर्म और संस्कृति की रक्षा करते हुए अपना बलिदान कर दिया। प्रबोधन कार्यक्रम में रासेयो के स्वयंसेवकों के साथ-साथ महाविद्यालय के छात्र व छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।
Wednesday, June 17
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