सुरक्षित मातृत्व का मतलब है – गर्भावस्था और प्रसव के दौरान गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना: डॉ प्रतिमा बघेल
राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस पर सुप्रयास ने आयोजित किया जागरूकता एवं स्वास्थ्य प्रशिक्षण शिविर
पण्डित दीपक चौधरी📞9826231755
भिण्ड ब्यूरो – रक्षित मातृत्व का मतलब है गर्भवती महिलाओं और नई माताओं को सुरक्षित और स्वस्थ गर्भावस्था और प्रसव का अनुभव सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना। सुरक्षित मातृत्व से तात्पर्य यह भी है कि हम एक समाज के रूप में गर्भावस्था और प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं को रोकें तथा उनका समुचित प्रबंधन करें। जिससे प्रसव के बाद होने वाले रक्तस्राव, प्री-एक्लेमप्सिया, सेप्सिस और बाधित की परेशानियों को दूर कर सकें।
उक्त उद्गार जामना की कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर डॉ प्रतिमा बघेल ने जामना रोड, सरसई का पुरा स्थित एम वी के अकैडमी मैं आयोजित सुरक्षित मातृत्व शिविर में व्यक्त किए। उक्त शिविर का आयोजन सामाजिक संस्था सुप्रयास के द्वारा किया गया।
गर्भवती और नई माताओ को संबोधित करते हुए डॉ बघेल ने कहा सुरक्षित मातृत्व का उद्देश्य महिलाओं को प्रसवपूर्व देखभाल, कुशल प्रसव परिचारिकाओं, आपातकालीन प्रसूति देखभाल और प्रसवोत्तर देखभाल तक पहुँच प्रदान करके मातृ मृत्यु दर को कम करना और मातृ स्वास्थ्य में सुधार करना है। ये सेवाएँ मातृ और शिशु मृत्यु को रोकने, माताओं और शिशुओं के स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार करने और लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक हैं।
बबेडी की कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर डॉक्टर प्रियंका मिश्रा ने बताया कि गर्भवती और नई माताओं के बीच सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के लिए, नियमित प्रसवपूर्व देखभाल से जटिलताओं की शीघ्र पहचान और प्रबंधन में मदद मिल सकती है तथा स्वस्थ गर्भावस्था परिणामों को बढ़ावा मिल सकता है। प्रसव के समय एक कुशल स्वास्थ्य कार्यकर्ता की उपस्थिति से मातृ एवं नवजात मृत्यु दर के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिलताओं के प्रबंधन के लिए आपातकालीन देखभाल तक पहुंच महत्वपूर्ण है। इसके अलावा प्रसवोत्तर देखभाल से प्रसव के बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी जटिलता की पहचान और प्रबंधन में मदद मिल सकती है तथा यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि माँ और बच्चा स्वस्थ हैं। परिवार नियोजन सेवाएं महिलाओं को अनचाहे गर्भधारण से बचने, मातृ मृत्यु दर और रुग्णता के जोखिम को कम करने तथा माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं।
जिला चिकित्सालय में आईसीटीसी परामर्शदाता श्रीमती सीमा जैन ने कहा गर्भावस्था के पूर्व, दौरान तथा पश्चात एक स्त्री के शरीर और मन दोनों में परिवर्तन आते हैं। इन परिवर्तनों के लिए उसे स्त्री को भी तैयार होना होता है और उसके परिवार को भी तैयार होना होता है। गर्भावस्था में शरीर के खान-पान नींद आदि कार्यक्रमों में परिवर्तन होते हैं जिससे कुछ जटिलताएं हो जाती हैं। ओपन जाटलताओं से निपटने के लिए परिवार के परामर्श की बहुत आवश्यकता होती है। मनोवैज्ञानिक परामर्श से गर्भावस्था की जटिलताओं को बहुत हद तक न केवल काम किया जा सकता है अपितु गर्भवती माता को उन जटिलताओं से सामना करने के लिए तैयार भी किया जा सकता है।
सुप्रयास के सचिव डॉ मनोज जैन ने कहा कि प्रसवपूर्व देखभाल स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को गर्भवती माताओं को गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ व्यवहार, जैसे उचित पोषण, व्यायाम और तनाव प्रबंधन के बारे में शिक्षित करने का अवसर प्रदान करती है। यह गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी चिंता या समस्या के लिए भावनात्मक समर्थन और परामर्श भी प्रदान करता है। आज के दौर में हर महिला के हाथ में स्मार्टफोन है। इस दौर में तकनीक का उपयोग सुरक्षित मातृत्व के लिए भी किया जाना चाहिए। इसके लिए गर्भावस्था की देखभाल के लिए टेली-परामर्श टेलीकंसल्टेशन-वीडियो, फोन या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ से दूरस्थ परामर्श, गर्भावस्था परामर्श प्रदान करने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है। यहाँ कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे टेलीकंसल्टेशन गर्भवती माताओं की मदद कर सकता है। टेलीकंसल्टेशन से गर्भवती माताओं को स्वास्थ्य सेवा केंद्र तक जाने की आवश्यकता के बिना अपने घर पर ही गर्भावस्था परामर्श प्राप्त करने की सुविधा मिल सकती है। यह ग्रामीण या दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं, गतिशीलता संबंधी समस्याओं वाली महिलाओं या उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद हो सकता है जिन्हें व्यक्तिगत रूप से अपॉइंटमेंट के लिए काम से समय निकालने में कठिनाई होती है।
शिविर में स्वास्थ्य कार्यकर्ता नीरज जयंत ने सभी का आभार व्यक्त करके शिविर का समापन किया।


