– मीडिया कर्मियों के द्वारा प्रश्न पूछने पर सत्ता के नशे में चूर भाजपा के मंत्रियों को भड़कने की आदत निंदनीय
भिण्ड, 11 फरवरी। जिला कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पंकज त्रिपाठी ने केन्द्रीय बजट में जिले के विकास के लिए मीडिया कर्मियों द्वारा सवाल किए जाने पर भिण्ड प्रवास पर आए प्रदेश के कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंषाना द्वारा उचित उत्तर न देते हुए भड़ककर तीखे तेवर में बोलने पर नाराजगी जाहिर करते हुए निंदा की है।
कांग्रेस मीडिया प्रभारी पंकज त्रिपाठी ने कहा कि देश के चौथे स्तंभ कहलाए जाने वाले मीडिया कर्मियों द्वारा जन विकास के मुद्दे पर भाजपा सरकार के जिम्मेदार नेता, मंत्री, सांसद और विधायकों से जब भी सवाल किया जाता है तो वह उचित एवं ठोस जबाब देने के बजाय उल्टे पत्रकार बंधुओं पर ही भड़क उठते हैं। इससे ऐसा लगता है कि पत्रकारों द्वारा जन विकास से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने पर भाजपा के नेताओं और मंत्रियों को मीडिया कर्मियों पर भड़कने की आदत पड़ गई है। हो भी क्यों न, जब भाजपा सरकार ने जन विकास के कोई काम नहीं किए तो जनता या पत्रकार को ठीक से उत्तर क्या दे सकते हैं। अभी हाल के घोषित हुए बजट में आमजनता को महंगाई से कोई राहत नहीं मिली।
त्रिपाठी ने यह बात केन्द्र सरकार के बजट की खूबियों को बताने के लिए मंगलवार को भिण्ड प्रवास पर आए प्रदेश के कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंषाना से जब मीडिया कर्मियों ने पूछा कि इस बजट में भिण्ड जिले को क्या मिला है, तो वह विस्तार से कुछ नहीं बता पाए। इतना ही नहीं, मीडिया कर्मियों ने जिले का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे के बिषय में मंत्री से पूछा कि एनएच-719 को फोरलेन करने की घोषणा हो चुकी है, क्या यह प्रोजेक्ट केन्द्र सरकार के इस बजट में शामिल हुआ है, मंत्री ने इसका कोई जवाब नहीं दिया, उल्टा यह कहने लगे कि कुछ लोगों की तो आलोचना करने की आदत हो गई है। अब सत्ता के नशे में चूर भाजपा के मंत्री जी को यह कौन बताये कि आपकी त्रिपल इंजन की सरकार है, तो आमजन की आवाज उठाने वाले मीडिया कर्मियों के प्रश्नों के ठीक से उत्तर देने की भी जिम्मेदारी आप और आपकी सरकार की बनती है।
उन्होंने कहा भाजपा के शासनकाल में पत्रकारों द्वारा सवाल पूछने पर ठीक से उत्तर देने के बजाय भाजपाई नेताओं और मंत्रियों द्वारा आए दिन गलत व्यवहार किए जाने कि खबरें आती रहती है, जैसे कि अभी कुछ दिन पहले इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर मीडिया कर्मियों द्वारा सवाल किए जाने पर सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा उचित उत्तर देने के बजाय ‘क्या घण्टा’ जैसे बेतुकी बात बोली गई, तो कहीं धक्का-मुक्की करना, कैमरे छीनना अथवा तोड़ना, यहां तक कि धमकी-मारपीट और तो और झूठी एफआईआर दर्ज करा कर बेबजह परेशान किए जाने की खबरें मिलती रहती हैं।
त्रिपाठी ने कहा कि मीडिया कर्मियों द्वारा जनता से जुड़े सवालों का सत्ता में बैठे हुए जिम्मेदार मंत्री, सांसदों, विधायकों को शालीनता के साथ उचित एवं ठोस उत्तर देना चाहिए, क्योंकि यह सरकार और उसके जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की दायित्व और जिम्मेदारी बनती है।


