– राकेश अचल
लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता डरपोक हैं या डरावने, ये बहस कांग्रेस से पलायन कर चुके अल्पसंख्यक नेता शकील अहमद के एक पाडकास्ट से शुरू हुई है। अहमद ने राहुल को बहुत ही असुरक्षित नेता बताया है। शकील अहमद ने कहा कि राहुल गांधी एक डरपोक और इनसिक्योर नेता हैं, जो पार्टी में सिर्फ उन्हीं युवा नेताओं को आगे बढ़ा रहे हैं, जो उनकी तारीफों के पुल बांधते हैं और जिनके पास कोई जमीनी समझ नहीं है।
आपको पता है कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री शकील अहमद कांग्रेस के महासचिव पद पर भी रह चुके हैं। उन्होंने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। वे बिहार से तीन बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं। 70 साल के शकील अहमद दूसरे भगोड़े कांग्रेसी नेताओं से अलग नहीं हैं। उनकी तरह राहुल गांधी से डरकर गुलामनबी आजाद भी भाग चुके हैं और ज्योतिरादित्य सिंधिया भी। भाजपा को आज कल राहुल गांधी का मुकाबला करने के लिए शकील अहमदों का ही सहारा है।
शकील अहमद ने कहा कि राहुल गांधी ऐसे वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में असहज महसूस करते हैं, जिनकी समाज में पहचान और जनाधार है। इसी वजह से वे उन लोगों को तरजीह देते हैं, जिनका अपना कोई राजनीतिक आधार नहीं है। शकील ने राहुल गांधी को तानाशाही प्रवृत्ति का और गैर लोकतांत्रिक नेता बताते हुए कहा कि वे कांग्रेस के वरिष्ठ साथियों की बात नहीं सुनते और यह मानकर चलते हैं कि पार्टी अपनी राष्ट्रीय मौजूदगी के चलते कभी दूसरे नंबर से नीचे नहीं जा सकती।
कांग्रेस में रहकर जब तक शकील अहमद को मलाई चाटने को मिली तब तक राहुल उनके लिए भी देवता थे, लेकिन जैसे ही कांग्रेस ने उन्हें किनारे करना शुरू किया वैसे ही राहुल गांधी में ऐब ही ऐब नजर आने लगे। अहमद ने यह भी याद दिलाया कि राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए अमेठी सीट हार गए थे। उनका कहना था कि राहुल गांधी अपने पूर्वजों और परिवार द्वारा दशकों तक संवारी गई सीट भी अपने रवैये की वजह से नहीं बचा पाए।
मुमकिन है कि शकील भाई का आंकलन सही हो, लेकिन जिस ढंग से वे फटे हैं, उसे देखकर लगता है कि वे राहुल के डर से ही कांग्रेस छोड़कर भागे थे, ये सोचकर कि उनका कथित जनाधार देखकर कोई दूसरी पार्टी उन्हें अपना लेगी, लेकिन ये हो न सका। शकील मियां का कहना है कि जहां सोनिया गांधी ने राजीव गांधी की कांग्रेस और नरसिम्हा राव और सीताराम केसरी की कांग्रेस को पूरी तरह अपने नियंत्रण में कर लिया था, वहीं राहुल गांधी, सोनिया गांधी की कांग्रेस को भी अपनी नहीं बना सके।
शकील अहमद पर मुझे तो दया आती है। वे घर के रहे न घाट के। उनके कहने से राहुल की छवि डरपोक और असुरक्षित नेता की नहीं होने वाली, क्योंकि आज सत्ता के खिलाफ वे ही टीशर्ट पहनकर चट्टान की तरह डटे हुए हैं। राहुल गांधी से आतंकित भाजपा अहमद के इस बयान से खुश है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि शकील अहमद ने राहुल गांधी को बेनकाब कर दिया है। राहुल गांधी खुद को सबसे सहिष्णु और लोकतांत्रिक नेता के तौर पर पेश करते हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है।
शहजाद पूनावाला भी शकील अहमद की बिरादरी के हैं। उन्होने भी सियासत कांग्रेस से ही सीखी और 11 साल कांग्रेस का दूध पीकर ही उन्हें जब अक्ल की दाढ़ निकली तो वे कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। बेहतर हो कि पूनावाला भाजपा के नऐ अध्यक्ष नितिन नवीन से कहकर शकील अहमद को भाजपा में शामिल करा लें। क्योंकि वे महावीर हैं।


