– राकेश अचल
इस साल में होने वाले असम विधानसभा के चुनाव भाजपा के लिए बंगाल से कम महत्वपूर्ण नहीं है। भाजपा को बंगाल में सत्ता छीनना है और असम में सत्ता छीने जाने से बचाना है। इसीलिए असम में भाजपा ने महिला मतदाताओं पर डोरे डालना शुरू कर दिया है। महिला मतदाताओं को लुभाकर भाजपा मप्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र और हाल ही में विधानसभा चुनाव जीत चुकी है। अब असम विधानसभा चुनाव से महज चार महीने पहले सीएम सरमा ने महिला लाभार्थियों के लिए नकदी स्कीम की घोषणा कर सत्ता में वापसी का दांव खेल दिया है। नए साल के पहले दिन मुख्यमंत्री सरमा ने राज्य की 37 लाख महिलाओं को अपनी प्रमुख अरुणोदय योजना के तहत 8 हजार रुपए का ‘बिहू उपहार’ के तौर पर देने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री मानते हैं कि ‘चुनाव के समय अरुणोदय योजना का वितरण हमेशा एक विवादित विषय बन जाता है। विपक्ष भी कई बार आपत्ति जताता है। लिहाजा 20 फरवरी को असम की प्रत्येक अरुणोदय योजना की लाभार्थी को बिहू के उपहार के तौर पर 8 हजार रुपए दिए जाएंगे। जनवरी से अप्रैल तक अरुणोदय योजना का पैसा नहीं मिलेगा, इसलिए एक साथ 8 हजार रुपए दे रहे हैं। फिर मई से हर महीने मिलते रहेंगे। जनवरी से अप्रैल तक 1250 रुपए के हिसाब से 5 हजार होते हैं और हमने इसमें 3 हजार रुपए अपनी तरफ से जोड़ दिए हैं।
अरुणोदय एक वित्तीय सहायता योजना है, जिसमें हर महीने महिला लाभार्थी के बैंक में सीधे 1250 रुपए ट्रांसफर किए जाते हैं। 2020 में शुरू हुई इस योजना में अभी लगभग 37 लाख लाभार्थी हैं। मुख्यमंत्री ने एक और नई लाभार्थी योजना की घोषणा करते हुए अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट पुरुष छात्रों को हर महीने वित्तीय मदद देने का ऐलान किया है। इस ‘बाबू योजना’ के तहत सरकार एक फरवरी से योग्य पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को हर महीने 2 दो रुपए और योग्य अंडर ग्रेजुएट छात्रों को एक हजार रुपए की वित्तीय मदद देगी। इस योजना का फायदा केवल उन छात्रों को मिलेगा जिनके परिवार की सालाना घरेलू आय 4 लाख रुपए तक होगी।
आपको याद होगा कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने नवंबर में बिहार चुनाव नतीजों के बाद दावा किया था कि महिला सशक्तीकरण योजनाओं के ‘असम मॉडल’ ने नीतीश कुमार की जीत में योगदान दिया। सीएम सरमा ने दावा किया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लागू की गई महिला केन्द्रित योजनाएं उनकी सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं से प्रेरित थीं। मुख्यमंत्री सरमा ने बिहार में वोटरों को नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (एनडीए) के पक्ष में प्रभावित करने का दावा करते हुए कहा था, ‘जब हमने बेहाली, नलबाड़ी, ढेकियाजुली में सबल महिला, सबल समाज स्कीम शुरू की, तो बिहार सरकार को भी अलग-अलग मीडिया के जरिए इसके बारे में पता चला। वे जानना चाहते थे कि हमने ये स्कीमें क्यों और कैसे शुरू की हैं। हमने समझाया कि हमारा मकसद हर महिला को ‘लखपति बाइदेओ’ (लखपति बहन) बनाना है।
असम जीतने के लिए कांग्रेस ने भी इस बार श्रीमती प्रियंका वाड्रा को कमान सौंपी है। प्रियंका के साथ तीन और नेता रहेंगे। असम में पिछले चुनाव में भाजपा को 75 और कांग्रेस को 49 सीटें मिली थीं। असम में कांग्रेस के लिए संभावना है। बिहार में कांग्रेस सत्ता में आने के लिए नहीं भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए चुनाव मैदान में उतरी थी। बंगाल में भी उसका यही लक्ष्य होगा।
असम में केन्द्र सरकार ने एसआईआर नहीं कराया है। असम भाजपा के लिए अभी भी सम बना हुआ है, लेकिन जिस तरह से पूर्वी भारत में भाजपा विरोधी लहर चल रही है उसे देखते हुए भाजपा सतर्क है। असम के मुख्यमंत्री कांग्रेस के विभीषण हैं। उनके ऊपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, यही योग्यता भाजपा में उन्हें स्टार बनाए हुए है। अब कांग्रेस हेमंत के नेतृत्व को पतझड़ में बदल पाएगी या नहीं, इसी पर सबकी नजर टिकी है।


