– राकेश अचल
कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें इंडियन प्रीमियर लीग के पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी और भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को एक साथ पार्टी करते देखा गया। अब इस वीडियो को लेकर भारत सरकार की प्रतिक्रिया सामने आई है। लेकिन मुझे ये वीडियो देखकर 1972 में बनी फिल्म विक्टोरिया नं.203 याद आ गई। इसे ब्रिज सदाना ने निर्देशित और निर्मित किया था। फिल्म में अशोक कुमार, प्राण, सायरा बानो और नवीन निश्चल थे। माल्या और ललित मोदी की जोड़ी भी प्राण और अशोक कुमार की जोड़ी जैसी है।
मजे की बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ललित मोदी और विजय माल्या जैसे बड़े भगोड़ों को वापस लाने के लिए 2014 से प्रतिबद्ध है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से ललित मोदी और विजय माल्या के इस वायरल वीडियो को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि जो भी भगोड़े हैं, उन्हें वापस लाने के लिए भारत सरकार प्रतिबद्ध है, जो भी हमारे कानून से भागे हैं, भागे हुए लोग हैं, उनको हम वापस लाएंगे। इस मामले में कई देशों के साथ हमारी बातचीत चल रही है।
आईपीएल फाउंडर ललित मोदी ने विजय माल्या के 70वें जन्मदिन के मौके पर लंदन में हुई एक पार्टी का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इस वीडियो में ललित मोदी ने खुद को और माल्या को भारत के दो सबसे बड़े भगोड़े कहा था। इस वीडियो में ललित मोदी कह रहे हैं कि हम दो भगोड़े हैं, भारत के दो सबसे बड़े भगोड़े। इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए ललित मोदी ने कैप्शन में लिखा कि भारत में फिर से इंटरनेट को डाउन कर दो। मेरे प्यारे दोस्त विजय माल्या को जन्मदिन की बधाई।
आपको याद होगा कि ललित मोदी नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के चार साल पहले यानि साल 2010 से भारत से बाहर हैं और उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई फाइनेंशियल गड़बड़ियों के आरोपों के बाद भारत छोड़ना पड़ा था। जबकि विजय माल्या भी किंगफिशर एयरलाइंस के पतन के बाद कानूनी मुश्किलों के चलते 2016 में भारत से भाग गए थे। माल्या पर 9 हजार करोड़ का गबन करने का आरोप है।
ललित मोदी भाजपा संरक्षित भगोड़े हैं, जबकि विजय माल्या कांग्रेस संरक्षित। ललित हकलाते हैं और माल्या इठलाते हैं। माल्या गांधीवादी हैं, उन्होंने एक नीलामी में महात्मा गांधी की तमाम सामग्री 11 करोड़ रुपए में खरीदी थी। बहरहाल दोनों भारत के शीर्ष भगोड़े हैं। भगोड़े हों या मंगोड़े दोनों की अनदेखी नहीं की जाती।
वर्तमान में विदेश में रहने वाले भगोड़े आर्थिक अपराधियों की सूची में पुष्पेश बैद, आशीष जोबनपुत्र, विजय माल्या, सनी कालरा, संजय कालरा, सुधीर कुमार कालरा, आरती कालरा, वर्षा कालरा, जतिन मेहता, उमेश पारेख, कमलेश पारेख, नीलेश पारेख, एकलव्य गर्ग, विनय मित्तल, नीरव मोदी, नीशाल मोदी, मेहुल चोकसी का नाम प्रमुख है।
भगोड़ों को लेकर सीबीआई ने जनवरी 2025 में भारत पोल पोर्टल बनने के बाद सितंबर तक 189 रेड और ब्लू नोटिस जारी कराए। जो कि सीबीआई के इतिहास का एक कीर्तिमान है। सीबीआई डायरेक्टर प्रवीण सूद ने ‘भगोड़ों का प्रत्यर्पण: चुनौतियां और रणनीतियांÓ विषय पर आयोजित सम्मेलन में कहा था कि भगोड़ों को हिरासत में लेने के लिए इंटरपोल से रेड नोटिस जारी करने के अनुरोधों पर एक्शन के समय में भी काफी कमी आई है। यह 14 महीने से घटकर अब तीन महीने रह गया है, इस समय विभिन्न देशों के पास 338 प्रत्यर्पण अनुरोध लंबित हैं। मोदी की सरकार भले ही माल्या-मोदी को भारत न ला पाई हो किंतु इसी साल सितंबर तक विभिन्न मामलों में 35 भगोड़ों को भारत लाने में सफलता पाई गई है। जबकि 2024 में 30 और 2023 में 29 भगोड़े देश में वापस लाए जा सके थे।
बहरहाल हमारी सरकार को माल्या और ललित मोदी जैसे भगोड़े जब तब चिढ़ाते रहते हैं। ललित मोदी 63 के हो चुके हैं और माल्या 70 के। अब शायद इन दोनों को भारत की याद आती भी नहीं होगी। आती भी होगी तो आकर लौट जाती होगी। माल्या तो राज्यसभा के सदस्य के पूर्व सदस्य के नाते संसद में याद भी किए जाएंगे, लेकिन ललित मोदी को बसुंधरा राजे के अलावा शायद ही कोई याद करे। ये दोनों मोदी सरकार की नाकामयाबी का सबसे बड़ा प्रतीक हैं।


