भिण्ड, 22 नवम्बर। केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच आज से लागू किए गए श्रमिक विरोधी और पूंजीपति परस्त लेबर कोड्स की एकतरफा और मनमानी घोषणा की कड़े शब्दों में निंदा करता है। हम इसे देश के मेहनतकशों के साथ किया गया केन्द्र सरकार का धोखाधड़ीपूर्ण कदम करार देते हैं। यह जानकारी प्रेस को जारी विज्ञप्ति में सीटू जिला महासचिव अनिल दौनेरिया ने दी।
केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों का मंच सरकार को कड़ी चेतावनी देता है कि जब तक लेबर कोड्स वापस नहीं लिए जाते, तब तक मजदूर वर्ग एक अडिग और निर्णायक लड़ाई लड़ेगा। किसानों और श्रमिकों के संयुक्त राष्ट्रीय अह्वान पर 26 नवंबर को दोपहर 11 भिण्ड जिलाधीश कार्यालय पर संयुक्त किसान मोर्चा एवं संयुक्त ट्रेंड यूनियंस मंच मिलकर करेगी।
दौनेरिया ने बताया कि 21 नवंबर को जारी की गई इन तथाकथित चार लेबर कोड्स की अधिसूचना लोकतांत्रिक भावना का खुला उल्लंघन है और भारत के कल्याणकारी राज्य के चरित्र को बर्बाद कर देती है। दस केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र औद्योगिक महासंघों का संयुक्त मंच इन दमनकारी लेबर कोड्स का विरोध उस दिन से कर रहा है जब ये 29 केन्द्रीय श्रम कानूनों को खत्म करके पारित किए गए। 2019 में वेज कोड के पारित होने के तुरंत बाद देशभर में विरोध आंदोलन शुरू हुए और जनवरी 2020 की आम हड़ताल में परिणत हुए। और जब अन्य तीन कोड औद्योगिक संबंध कोड, सामाजिक सुरक्षा कोड, व व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां कोड सितंबर 2020 में पारित किए गए, तो तत्काल विरोध हुए और 26 नवंबर की ऐतिहासिक देशव्यापी हड़ताल हुई, जिसे संयुक्त किसान मोर्चा के दिल्ली चलो आंदोलन का समर्थन भी मिला। इसके बाद भी कई संयुक्त कार्रवाईयंा जारी रहीं, जिनका चरम था 9 जुलाई की ऐतिहासिक देशव्यापी हड़ताल, जिसमें 25 करोड़ से अधिक मजदूरों ने भाग लिया। इसके बावजूद केन्द्र की सत्तारूढ़ सरकार—बिहार चुनावों में मिली जीत से मदमस्त होकर आज से चारों लेबर कोड्स को लागू करने को लेकर सुपर-एम्पावर महसूस कर रही है, जैसा कि मीडिया रिपोर्टों और श्रम मंत्रालय के ट्वीट्स से स्पष्ट है। संयुक्त मंच ने बार-बार सरकार से भारतीय श्रम सम्मेलन तत्काल बुलाने और लेबर कोड्स को वापस लेने की मांग की। यह मांग 13 नवंबर को श्रम मंत्रालय द्वारा आयोजित श्रम शक्ति नीति 2025 पर बैठक में तथा 20 नवंबर को वित्त मंत्रालय की प्री-बजट परामर्श बैठक में भी दोहराई गई। लेकिन सरकार पूरी तरह असंवेदनशील और बेपरवाह बनी रही।
इसके विपरीत केन्द्र सरकार ने सभी अपीलों, विरोधों और हड़तालों को नजर अंदाज करते हुए इन कोड्स को लागू कर दिया, ताकि प्री-बजट परामर्श में नियोक्ताओं के संगठनों और सरकार समर्थक बीएमएस व अन्य समूहों की मांगें पूरी की जा सकें। संयुक्त मंच इस कदम को अलोकतांत्रिक, प्रतिगामी, मजदूर-विरोधी और पूंजीपति-परस्त करार देते हुए स्पष्ट रूप से घोषणा करता है कि श्रमिक जनता पर यह घातक हमला इतिहास के सबसे प्रचंड और संयुक्त प्रतिरोध से टकराएगा। सभी केन्द्रीय ट्रेड यूनियनें एक स्वर में इन कोड्स को मजदूरों के जीवन और आजीविका पर नरसंहार जैसा हमला बताती है, जो मजदूरों को वर्चुअल गुलामी में धकेल देगा और उनके हर अधिकार को छीन लेगा। यदि ये कोड लागू हुए तो आने वाली कई पीढ़ियों की आशाएं, अधिकार और सपने नष्ट हो जाएंगे।
केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र औद्योगिक महासंघों का संयुक्त मंच देश के सभी मजदूरों से आह्वान करता है कि 26 नवंबर को संयुक्त, जुझारू प्रतिरोध और अवज्ञा की कार्रवाई में एसकेएम के नेतृत्व में चल रहे किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर शामिल हों और लेबर कोड्स को रद्द कराने तथा श्रम शक्ति नीति 2025 को वापस लेने की मांग उठाएं। संयुक्त मंच सभी सदस्यों से अपील करता है कि वे अभी से कार्य स्थलों पर काले बिल्ले (ब्लैक बैज) पहनकर अपना प्रतिरोध दर्ज कराएं। सोमवार से देशभर में गेट मीटिंग्स, नुक्कड़ सभाएं, बस्तियों में बैठकों का आयोजन युद्धस्तर पर किया जाए, ताकि सरकार की उस साजिश को उजागर किया जा सके जो देश के, धन-सृजन करने वाले मेहनतकश वर्ग को कॉर्पोरेट मुनाफाखोरों के हाथों गुलाम बनाना चाहती है। केन्द्रीय ट्रेड यूनियनें स्पष्ट संदेश देती हैं कि गहराते बेरोजगारी संकट और बढ़ती महंगाई के बीच इन कोड्स को लागू करना देश के मेहनतकशों के खिलाफ युद्ध की घोषणा है। केन्द्र सरकार अपने कॉर्पोरेट सहयोगियों के साथ मिलकर देश को फिर से मालिक-नौकर के शोषणकारी दौर में ले जाने की कोशिश कर रही है। देवेन्द्र सिंह चौहान एडवोकेट, एचएस मौर्य, प्रेम नारायण माहौर, बीके बौहरे, विनोद सुमन, देवेन्द्र शर्मा, नाथूसिंह बघेल, जसराम राठौर, नरेन्द्र सिंह सैंगर, अंगद सिंह कुशवाहा, नेत्रपाल शाक्य, डॉ. नदीम खान, विजय सिंह कुशवाहा, रामौतार नरवरिया, अशोक शर्मा, राकेश कुशवाहा आदि ने आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।
Saturday, April 11
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