भिण्ड, 08 अप्रैल। मालनपुर नगर परिषद द्वारा 16 मार्च को नगर में जनगणना कार्य हेतु 42 शिक्षकों को ट्रेनिंग देकर जनगणना कार्य के लिए प्रतिनियुक्त किया था। इनमें से एक शिक्षक फील्ड ट्रेनर थे। जिसके चलते उन्हें जनगणना ड्यूटी से हटा दिया गया और एक शिक्षक विकलांग तो दो शिक्षकों को विशेषकर गंभीर बीमारी या स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देकर, ड्यूटी से राहत दी गई।
क्या अधिकारियों ने राजनीतिक दबाव में यह ड्यूटी हटाई या कोई अन्य कारण है। विकलांग एवं गंभीर रूप से बीमार शिक्षकों को जनगणना कार्य से राहत देना तो ठीक है, लेकिन कुछ ऐसे शिक्षक भी हैं जो न विकलांग है और ना ही गंभीर बीमार हैं। दबी जुबान से शिक्षक बता रहे हैं कि यह बहानेबाजी है और और कहीं ना कहीं अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बनाकर जनगणना ड्यूटी से राहत ली है, जो एक तरह से जनगणना कार्य में लगाए गए। अन्य शिक्षकों के साथ एक तरह से अधिकारियों का दोहरा चरित्र है। क्योंकि ड्यूटी कार्य में कई ऐसे शिक्षक भी लगाए गए हैं, जिन पर दो-दो स्कूलों के प्रभार हैं। बावजूद भी जानबूझकर ऐसे शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है।
इन शिक्षकों ने हटवाई ड्यूटी
माधुरी गुर्जर, रामकुमार शर्मा, प्रीति श्रीवास्तव, विभा द्विवेदी, मधु तोमर, आकांक्षा यह सभी 6 शिक्षक अपनी अपनी समस्या बात कर जनगणना ड्यूटी से बाहर हो गए हंै, लेकिन सवाल यह उठता है कि गंभीर बीमारी से ग्रसित या विकलांग शिक्षकों को ही राहत प्रदान की गई थी, बावजूद 6 शिक्षकों को किस आधार पर ड्यूटी से बाहर किया गया। यह बड़ा सवाल है। इस मामले में गोहद खंड शिक्षा अधिकारी श्याम सुंदर भारद्वाज के मोबाइल नंबर पर संपर्क करना चाहा तो फोन रिसीव नहीं हुआ।
इनका कहना है:
”हमने शा. उमावि में सभी शिक्षकों की बैठक ली थी, जो शिक्षक विकलांग एवं गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं। उनका नाम विभाग ने ही जनगणना कार्य से हटा दिया है। इसमें हमारा कुछ लेना-देना नहीं है, जो शिक्षक आरोप लगा रहे हैं वह शिक्षक काम से बचना चाहते हैं।”
रेहान अली जैदी, मुख्य नगर परिषद अधिकारी मालनपुर

