– राकेश अचल
उनका क्रिकेट से कोई लेना देना नहीं, उनका देशभक्ति से कोई लेना देना नहीं, लेकिन वे अभिनेता शाहरुख खान के पीछे हाथ धोकर पड़े हैं, क्योंकि शाहरुख आसान लक्ष्य है। वे देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ एक शब्द नहीं बोल सकते, क्योंकि जानते हैं कि प्रधानमंत्री उनकी दुकान बंद करा सकते हैं। मार्च 2026 में होने वाले आईपीएल से पहले देश का सियासी और मजहबी माहौल गर्म है। बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्ताफिजुर रहमान को खरीदने के बाद कोलकाता नाइट राइडर्स विवादों के को-ओनर और सुपर स्टार शाहरुख खान भी निशाने पर आ गए हैं। राजनीतिक नेता से लेकर धर्मगुरुओं तक, कई वर्गों की ओर से शाहरुख खान को निगल जाना चाहते हैं। शाहरुख को गद्दार तक कह दिया गया। गनीमत ये है कि शाहरुख अकेले नहीं हैं, उनके समर्थन में भी राजनेता उतर आए हैं।
क्रिकेट का क तक न जानने वाले कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर ने सबसे पहले शाहरुख पर वाक प्रहार किया। बाद में जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य और पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने देवकीनंदन ठाकुर का समर्थन कर डाला। रामभद्राचार्य ने कहा, वह (शाहरुख खान) हीरो नहीं हैं। शाहरुख खान का कोई चरित्र नहीं है। उनके काम गद्दार जैसे रहे हैं। अब जब गुरु बोले तो चेला पीछे कैसे रहता, सो पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि कहीं न कहीं वहां (बांग्लादेश) ऐसी घटनाएं हो रही हैं जो हिन्दुत्व के खिलाफ हैं। वहां के खिलाड़ियों को आवाज उठानी चाहिए, ताकि हिन्दुओं की रक्षा हो सके और वहां के लोग तथा बीसीसीआई इस मुद्दे को समझें।
सरधना के पूर्व विधायक संगीत सोम भी अभिनेता शाहरुख खान को आड़े हाथ ले चुके हैं। उन्होंने कहा कि वो रहमान (मुस्ताफिजुर) यहां कैसे आ सकता है। शाहरुख खान जैसे गद्दार देश में उन्हें खरीद कर साढ़े नौ करोड़ रुपए देने का काम करेंगे वो बिल्कुल नहीं चलेगा और भारत की जनता इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। दरअसल कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने ये मोर्चा खोला था। उन्होंने कहा था कि जिस देश ने शाहरुख को हीरो बनाया, सुपर स्टार बनाया, जिस देश ने इतना सामर्थ्य दिया कि तुम एक क्रिकेट टीम खरीद सको। देश ने तुम्हें इतना प्यार दिया, हिन्दू समाज ने भी ढेर सारा प्यार दिया। तो क्या बांग्लादेशी क्रिकेटर को लाकर हमारी छाती पर खिलाकर उसका ऋण चुकाओगे?
देवकीनंदन ठाकुर के बयान का महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने भी समर्थन किया। लेकिन भाजपा के उपेक्षित नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने जवाब भी दिया। उन्होंने कहा कि किसी को भी राष्ट्र भक्ति का प्रमाण पत्र बांटने का अधिकार नहीं है और किसी को भी राष्ट्र भक्ति का प्रमाण पत्र बांटने का ठेकेदार बनने की कोशिश नहीं करना चाहिए। धर्म के नाम पर धंधा करने वाले प्रवाचक बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में शरण देने के सरकार के फैसले पर एक शब्द नहीं बोलते, जबकि सारे फसाद की जड़ तो वे ही हैं। इन कथावाचकों को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के शामिल होने पर कोई आपत्ति नहीं, लेकिन शाहरुख के फैसले पर उदरशूल हो रहा है।
भारत-बांग्लादेश के बीच बिगड़ते राजनायिक हालात के बावजूद तेज गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान के इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेलने की संभावना पर इन गाल बजाने वालों के बयानों का कोई असर होने वाला नहीं है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने बांग्लादेशी खिलाड़ियों पर किसी भी तरह के प्रतिबंध से इनकार किया है। आपको बता दूं कि मुस्ताफिजुर रहमान आईपीएल 2026 के मिनी ऑक्शन में बिकने वाले इकलौते बांग्लादेशी खिलाड़ी रहे। केकेआर ने उन्हें 9.20 करोड़ रुपए में अपनी टीम में शामिल किया।
शाहरुख को विवादों मैं घसीटकर सुर्खियों में आने की बीमारी नई नहीं हैञ मुझे याद है कि 1993 में माया मेमसाब फिल्म के इंटीमेट सीन पर पत्रकार से झड़प के बाद शाहरुख गिरफ्तार भी हुए। अमेरिकी एयरपोर्ट पर बार-बार डिटेन होने पर भी विवाद में आए थे शाहरुख। 2010 में पाकिस्तानी क्रिकेटर्स को आईपीएल में शामिल करने की मांग का भी शिवसेना ने विरोध किया, आरोप- सरोगेसी बच्चे पर जांच हुई, लेकिन आरोप गलत साबित। 2015 में भारत में बढ़ती असहिष्णुता पर बोलकर शाहरुख फंस चुके हैं। 2023 में पठान फिल्म में भगवा बिकिनी सीन पर विवाद हुआ। उनके बहिष्कार का नारा दिया उन पर धार्मिक भावनाएं आहत का आरोप लगा।


