– राकेश अचल
अपंजीकृत संगठन आरएसएस अब राजाश्रय में है, किंतु हिन्दुओं को लेकर संघ की चिंता बरकरार है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बांग्लादेश में हो रही हिंसा में हिन्दुओं को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई है और पूरी दुनिया के हिन्दुओं से एकजुट होकर बांग्लादेश के हिन्दुओं की मदद करने की अपील की है। मोहन भागवत चाहते हैं कि भारत सरकार भी बांग्लादेश के हिन्दुओं के लिए जरूरी कदम उठाए।
मोहन भागवत की चिंता भारत सरकार की चिंता मानी जाना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। भारत सरकार हिन्दुओं के उत्पीड़न को लेकर बांग्लादेश को आंख दिखा नहीं पा रही। वैसे भी भारत सरकार किसी दूसरे देश के अंदरूनी मामले में दखल कैसे दे सकती है? बांग्लादेश में बीते सप्ताह ईश निंदा के आरोप में हुई मॉब लिंचिंग में एक हिन्दू युवक की मौत हो गई थी। बांग्लादेश में इंकलाब मंच के नेता शरीफ उस्मान हादी की गोली मार कर हत्या के बाद हिंसा भड़क गई थी। हत्या के बाद हमलावरों के भारत से कनेक्शन होने की अफवाह उड़ा दी गई थी। हिंसा के दौरान ढाका में भारतीय उच्च आयोग को भी निशाना बनाया गया था- बाद में भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में भी थोड़ा तनाव महसूस किया गया।
मोहन भागवत का मानते है कि हिन्दुओं का एकमात्र देश भारत है, इसलिए संघ प्रमुख आगाह करते हुए कहते हैं, जो लोग गर्व से खुद को हिन्दू कहते हैं, उनसे हमेशा पूछा जाएगा कि उन्होंने अपने देश के लिए क्या किया है? मोहन भागवत चलाते तो हैं स्वयंसेवी संगठन, लेकिन करते हैं राजनीति। वे पश्चिम बंगाल के दौरे पर थे। पश्चिम बंगाल में करीब तीन महीने बाद ही विधानसभा के लिए चुनाव होने वाले हैं। संघ के 100 साल पूरे होने पर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु की ही तरह कोलकाता में भी ‘व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माणÓ कार्यक्रम हुआ, भागवत उसे ही संबोधित कर रहे थे।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं और स्थिति बेहद कठिन होती जा रही है। मुश्किल हालात में भी, अधिकतम सुरक्षा के लिए वहां के सभी हिन्दुओं को एकजुट होना पड़ेगा। भागवत भूल जाते हैं कि जब भारत में अल्पसंख्यक मुसलमानों पर जब ज्यादती होती है तब उनकी बोलती बंद हो जाती है? कल्पना कीजिए उनकी तरह ही जब किसी दूसरे मजहब के मोहन भागवत ऐसा ही आव्हान करने लगें तो क्या स्थिति बनेगी?
मोहन भागवत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र की बीजेपी सरकार से अपील करते हुए कहते हैं, हिन्दुओं का एकमात्र देश भारत है, भारत सरकार को इस पर ध्यान देना होगा, कुछ करना होगा। भागवत सरकार से अपील क्यों करते हैं। वे तो सरकार को आदेश दे सकते हैं, फिर वे ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि वे मोदी के मालिक नहीं आश्रित हैं और आश्रित सिर्फ आश्रित होता है।
मोहन भागवत संघ के ऐसे पहले प्रमुख हैं जो राजसत्ता के आश्रय में संघ चला रहे हैं। राजाश्रय तो कलाकारों की जरूरत होती है न कि किसी संगठन की। मेरा अपना अनुभव है कि जबसे आरएसएस राजाश्रय में गया है तब से संघ की संपत्ति तो बढ़ी है, लेकिन सेवाकार्य कम हो गया है। शाखाएं लगना लगभग बंद हो गई हैं। संघ के स्वयंसेवक सत्ता की मलाई चाटने में व्यस्त हैं। संघ के तमाम अनुसांगिक संगठनों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन करना छोड़ चुके हैं।


