भिण्ड, 22 नवम्बर। जिला कांग्रेस कार्यालय पर वीरांगना झलकारी बाई की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित की गई और संगोष्ठी आयोजित कर जयंती मनाई गई।
संगोष्ठी में विचार रखते हुए जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष महेश जाटव ने कहा कि महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीरांगना झलकारी बाई का जन्म 22 नवंबर 1830 को झांसी के निकट गांव में एक कोरी परिवार के यहां हुआ था। वह बड़ी होकर एक सैनिक और रानी लक्ष्मीबाई की विश्वसनीय सलाहकारों में से एक थी। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही घुड़सवारी, अस्त्र-शास्त्र की कला और एक योद्धा की तरह लड़ना सीख लिया था। वह बचपन से ही साहसी और कुशल योद्धा रहीं, उन्होंने झांसी की सेना में सेवा की और रानी लक्ष्मीबाई की महिला शाखा दुर्गा दल की सेनापति बनीं।
कांग्रेस एससी विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णगोपाल चौरसिया ने कहा कि झलकारी बाई कोरी 1857 में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की एक प्रमुख सैनिक और सलाहकार थीं, जो कोरी समुदाय से आती हैं। उन्होंने अपनी बहादुरी, युद्ध कौशल और रानी से मिलती-जुलती शक्ल के कारण 1857 के विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, खासकर झांसी की घेराबंदी के दौरान। रानी लक्ष्मीबाई की सुरक्षा के लिए उन्होंने रानी का वेश धारण किया, जिससे बिट्रिश सेना से रानी लक्ष्मीबाई को सुरक्षित भागने का मौका मिल गया। इसी दौरान अंग्रेजों ने उन्हें रानी समझकर पकड़ लिया। बाद में उन्हें फांसी दे दी गई। उनके साहस और बलिदान के सम्मान में भारत सरकार ने 22 जुलाई 2001 को उनके नाम पर एक डाक टिकट जारी किया। कार्यक्रम में मीडिया प्रभारी पंकज त्रिपाठी, कार्यालय प्रभारी रामस्वरूप शाक्य, सोशल मीडिया एवं आईटी सेल जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह भदौरिया, मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य भिण्ड विधानसभा प्रभारी अरविंद यादव, गौरव राजावत, विवेक जामौर, हरनारायण जाटव, कैलाश नारायण जाटव आदि उपस्थित रहे।
Monday, September 28
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