– कार्यकारी संचालक ने की फैक्ट्री प्रबंधकों के साथ बैठक
भिण्ड, 08 अप्रैल। वैश्विक स्तर पर बढ़ते गैस संकट का असर अब मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। प्राकृतिक गैस की अनियमित आपूर्ति, कच्चे माल की कमी और एलपीजी गैस की उपलब्धता में आ रही बाधाओं के चलते यहां संचालित औद्योगिक इकाईयां गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। इन ज्वलंत समस्याओं के समाधान एवं समन्वय के उद्देश्य से विकास भवन मालनपुर में आईआईडीसी की कार्यकारी संचालक अनीशा श्रीवास्तव की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। जिसमें औद्योगिक इकाईयों के प्रतिनिधियों ने गैस संकट को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।
प्रबंधकों ने बताया कि प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में लगातार हो रही कटौती के कारण उत्पादन प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई इकाईयों की उत्पादन क्षमता न्यूनतम स्तर तक गिर चुकी है, जिससे उद्योगों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। कुछ इकाइयों में आंशिक रूप से उत्पादन बंद करने की स्थिति भी उत्पन्न हो गई है। गैस संकट का सीधा असर श्रमिकों के रोजगार पर भी पड़ रहा है। प्रबंधकों ने आशंका जताई कि यदि शीघ्र ही गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो छंटनी जैसी स्थिति बन सकती है, जिससे क्षेत्र में बेरोजगारी बढ़ने का खतरा है। इसके अलावा कच्चे माल की समय पर उपलब्धता न होना भी उद्योगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सप्लाई चेन बाधित होने से उत्पादन लागत बढ़ रही है और समय पर ऑर्डर पूरे करना कठिन होता जा रहा है। औद्योगिक इकाईयों की कैंटीनों में एलपीजी गैस की कमी ने कर्मचारियों के दैनिक जीवन को भी प्रभावित किया है। भोजन व्यवस्था प्रभावित होने से श्रमिकों की कार्यक्षमता पर असर पड़ रहा है, जो उद्योगों की उत्पादकता के लिए चिंता का विषय है।
बैठक में उपस्थित प्रमुख प्रबंधक जितेन्द्र नागवानी, अभिषेक पाण्डेय (स्टर्लिंग एग्रो), मुकुल राय व मुकुल चतुर्वेदी (सूर्या रोशनी), अमित शर्मा (मार्वल विनायल), महेन्द्र कुमार (जमुना ऑटो), एसपी पांडेय (टेवा), मुकेश मेवाफरोश (सुप्रीम इंडस्ट्रीज), मुकेश भाटिया (डेयरी मेन), गिरीश तिवारी (डैफ्ट केमिकल), राघवेन्द्र सिंह (फिडिलिटी एग्रो), जितेन्द्र गुप्ता सहित अन्य ने अपनी-अपनी इकाईयों की समस्याओं को विस्तार से रखा।
मूलभूत सुविधाओं की कमी पर भी उठे सवाल
बैठक में केवल गैस संकट ही नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र की आधारभूत समस्याओं पर भी गंभीर चर्चा हुई। प्रबंधकों ने क्षेत्र में जलभराव की समस्या को प्रमुख मुद्दा बताते हुए कहा कि बरसात के दिनों में कई इकाईयों के आस-पास पानी भर जाता है, जिससे आवागमन और कार्य प्रभावित होता है। इसके साथ ही कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइट बंद होने के कारण रात्रि में अंधेरा छाया रहता है, जिससे दुर्घटनाओं और असुरक्षा की स्थिति बनी रहती है।
प्रबंधकों ने रात्रि गश्त बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा क्षेत्र में जगह-जगह चोक पड़े नालों की समस्या भी प्रमुखता से उठाई गई। नालों की सफाई न होने से जल निकासी बाधित हो रही है, जिससे जलभराव की स्थिति और गंभीर हो जाती है।
प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी
बैठक में तहसीलदार गोहद राकेश श्रीवास्तव एवं पटवारी संजय शर्मा की उपस्थिति भी रही, जिन्होंने औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं को गंभीरता से सुना और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
समाधान के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर
सभी उपस्थित सदस्यों ने एकमत होकर सुझाव दिया कि गैस आपूर्ति की नियमितता सुनिश्चित करने के लिए शासन स्तर पर त्वरित हस्तक्षेप किया जाए। साथ ही वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतों के उपयोग और कच्चे माल की उपलब्धता के लिए ठोस रणनीति तैयार की जाए। औद्योगिक क्षेत्र की आधारभूत समस्याओं- जैसे जलभराव, स्ट्रीट लाइट, नाला सफाई एवं सुरक्षा व्यवस्था—के समाधान के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर शीघ्र कार्रवाई करने पर भी जोर दिया गया।
अध्यक्षता कर रहीं अनीशा श्रीवास्तव ने सभी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि गैस संकट सहित अन्य सभी मुद्दों को उच्च स्तर पर प्राथमिकता के साथ उठाया जाएगा तथा संबंधित विभागों के सहयोग से त्वरित समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। बैठक का समापन सकारात्मक माहौल में हुआ, जहां सभी उद्योग प्रतिनिधियों ने सामूहिक प्रयासों के माध्यम से इस संकट से उबरने का संकल्प लिया। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो मालनपुर का औद्योगिक क्षेत्र एक गहरे आर्थिक एवं औद्योगिक संकट की ओर बढ़ सकता है।


