भिण्ड, 23 फरवरी। मप्र सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को साकार करने हेतु कृषि उपज के बेहतर मूल्य की सुनिश्चितता पर विशेष जोर दिया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने वाली इस पहल में सार्वजनिक उपार्जन प्रणाली, भावांतर योजना और आधुनिक विपणन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस दिशा में रिकार्ड 8091 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है, जो किसानों को बाजार की अनिश्चितताओं से बचाते हुए सही समय पर उचित दाम सुनिश्चित करेगा।
राज्य की मजबूत सार्वजनिक खरीद प्रणाली किसानों को मण्डी तक आसानी से पहुंच प्रदान करती है। पिछले रबी सीजन 2024-25 में 48.38 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2400 रुपए प्रति क्विंटल (125 रुपए बोनस सहित) पर भुगतान किया गया। इससे किसानों को लाखों रुपए का लाभ हुआ। गेहूं के अलावा धान, सोयाबीन, कोदो-कुटकी, चना, उड़द एवं मसूर जैसी फसलों के उपार्जन हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं। भावांतर योजना, बोनस राशि, मण्डियों में सुविधाओं का विस्तार तथा पोर्टल जैसी व्यवस्थाएं कृषकों को बाजार से जोड़ने में सहायक होंगी। खाद्य प्रसंस्करण एवं कृषि आधारित मार्केट प्लेस से मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा। राज्य में खाद्य प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे, परिवहन, गोदाम और कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। कृषि उपज के बेहतर मूल्य की सुनिश्चितता हेतु वर्ष 2026-27 के लिए 8091 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
Tuesday, September 29
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