भिण्ड, 31 अक्टूबर। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शा. एमजेएस महाविद्यालय भिण्ड में राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में सरदार वल्लभभाई पटेल के व्यक्तित्व और उनके प्रेरणाप्रद विचार पर कार्यशाला का आयोजन महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. आरए शर्मा के मार्गदर्शन में किया गया। सर्वप्रथम वल्लभभाई पटेल के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
प्राचार्य डॉ. आरए शर्मा ने वल्लभभाई पटेल के जीवन व्यक्तित्व पर संबोधित करते हुए बताया कि भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय एकीकरण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें 560 से अधिक रियासतों को एकीकृत करने का कार्य सौंपा गया था जो भारत के क्षेत्रफल और जनसंख्या का लगभग 40 प्रतिशत था और उन्हें भारत संघ में शामिल करने का कार्य सौंपा गया था। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के तहत रियासतों के शासकों को यह निर्णय लेने का विकल्प दिया गया था कि वे भारत या पाकिस्तान में से किसी में भी शामिल होना चाहते हैं या नहीं। सरदार पटेल ने विभाजन को रोकने के लिए कूटनीतिक वार्ता, अनुनय-विनय और जहां आवश्यक हो, वहां दृढ़ प्रशासनिक उपायों का संयोजन अपनाया। अपने नेतृत्व वाले राज्य विभाग के माध्यम से, सरदार पटेल ने 15 अगस्त 1947 तक या उसके तुरंत बाद इन राज्यों को सफलतापूर्वक एकीकृत किया, जिससे आधुनिक भारत की क्षेत्रीय अखण्डता सुनिश्चित हुई। उनके प्रयासों ने संभावित विभाजन को टाल दिया और एक संयुक्त लोकतांत्रिक गणतंत्र की नींव रखी। यह लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का निर्णायक नेतृत्व ही था जिसने देश के विभाजन के उथल-पुथल भरे दौर में आंतरिक स्थिरता सुनिश्चित की। उन्होंने अखिल भारतीय सेवाओं को स्टील फ्रेम के रूप में सृजित किया जो देश की एकता और अखण्डता की रक्षा करना आगे भी जारी रखेगा।
प्रो. मोहित कुमार दुबे ने मंच संचालन करते हुए बताया कि जब हिन्दुस्तान आजाद हुआ तब देश में करीब 565 रियासतें थीं। इनमें से कुछ रियासतें ऐसी थीं जो भारत में शामिल नहीं चाहती थीं। लेकिन सरदार पटेल ने अपने शानदार नेतृत्व व प्रशासनिक क्षमता से इन रियासतों को भारतीय संघ में मिलवाया और देश के और टुकड़े होने से रोका। यही वजह है कि उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के तौर पर मनाया जाता है। वर्ष 2015 से 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। उनको भारत का बिस्मार्क भी कहा जाता है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन ने 14 अगस्त 1998 के अपने भाषण में कहा था कि यदि नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखी, उसके आर्थिक, औद्योगिक और वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया और भारत की भावनात्मक एकता कायम करने की कोशिश की, तो सरदार पटेल ने भारत को असंगठित प्रांतों और रियासतों की संरचना से बाहर निकाल कर एक संघ में परिवर्तित किया। उन्होंने देश को ताकत के बलपर नहीं, बल्कि अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और चतुर शासन-कला के बल पर एकता के सूत्र में पिरोया।
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तरी सेशन का आयोजन किया गया, जिसमें मोहित कुमार दुबे ने विद्यार्थियों से सरदार वल्लभभाई पटेल के स्वर्णिम भारत निर्माण में अहम योगदान पर आधारित प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर विद्यार्थियों को समझ कर दिया। अंत में शपथ ग्रहण की गई और राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई 2 के अंतर्गत रन फॉर यूनिटी गतिविधि का भी आयोजन डॉ. राजीव कुमार जैन द्वारा किया गया। इस अवसर पर समस्त महाविद्यालयीन स्टाफ और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
Friday, August 7
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