भिण्ड। अटेर विधायक हेमंत सत्यदेव कटारे ने संपूर्ण प्रदेश के शिक्षक संघों की परेशानी पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राज्य में शिक्षा का अधिकार अधिनियम वर्ष 2010 से लागू है, परंतु वर्तमान में बिना पात्रता परीक्षा (टेट) के सेवा में लिए जाने हेतु यह नियम वर्ष 2010 से पूर्व के नियुक्त शिक्षकों पर भी प्रभावी किया जा रहा है।
विधायक कटारे ने कहा कि वर्तमान में लंबे सेवाकाल के पश्चात इन शिक्षकों पर पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता लागू होने से उनमें मानसिक तनाव, असुरक्षा एवं भविष्य को लेकर चिंता का वातावरण निर्मित हुआ है। इतने वर्षों की सेवा देने के पश्चात पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता होना शिक्षकों के साथ न्यायसंगत व व्यवहारिक होना प्रतीत नहीं होता है। वर्ष 2010 से पूर्व के नियुक्त शिक्षकों को पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से मुक्त किए जाने तथा उनकी सेवा-सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु राज्य शासन की ओर से उचित समाधान किए जाने तथा इस हेतु यदि आवश्यक हो तो विधानसभा का विशेष सत्र आहूत कर उचित निराकरण की मांग की गई है।
Sunday, September 27
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