जबकि जग में सुन्दर हैं दो नाम नरेन्द्र मोदी पंडित राहुल गाँधी है नाम………
भिण्ड ब्यूरो –राष्ट्रीय हनुमान सेना पार्टी मुख्यालय समयचक्र सरकार देवऋषि आश्रम ग्राम मुड़ियाखेड़ा ग्राम कुरथरा के अन्तर्गत रेलवे स्टेशन के पास अटेर रोड निण्ड (म.प्र.) से राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पृथक चमबल प्रदेश गठन की मांग के संयोजक नरसिंह कुनार चौबे ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि चम्बल नदी का उदय मालवा मध्यप्रदेश में हुआ है। मालवा से चली चम्बल, राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा पर बाँधों का निर्माण हुआ। निर्माण होने से किसानों की समस्याओं का निदान हुआ और किसान खुशहाल हुआ और चम्बल अंचल में आकर चम्बल नदी का अस्त हुआ। यहां पर चम्बल नदी का पानी ऐसा है किसान वर्षा के पानी पर निर्भर रहता है। जबकि अंचल में पांच-पांच नदियों जल संगम है। क्वारी चम्बल यनुना सिंघ और पहुज जल संगम पर पचनदा बांध की परियोजना 25 अक्टूबर 1983 में बनी थी। केन्द्रद सरकार से योजना के लिए लाखों-अरबों रूपयों का बजट आता रहा है। पचनद। बांध परियोजना पर काम आज दिनांक तक शुरू नहीं हो पाया है। इसलिए अब चम्बल की जनात जाग चुकी है पृथक चम्बल प्रदेश के गठन के लिए।
चौबे ने बताया कि अगर पचनदा बांध का निर्माण हो जाता तो चम्बल अंचल में भूमि कटाव कम होता तो जमीन का वाटर लेवल कम नहीं होता। सिंचाई, बिजली समस्या का समाधान होता। चम्बल अंचल में नदियों का पानी ऐसा नहीं है इसलिए किसान वर्षा पर निर्भर रहता है और कर्ज में डूबा रहता है।
चौबे ने बताया कि चम्बलांचल की समस्यायें एवं निदान के मुख्य बिन्दुओं को लेकर राष्ट्रीय हनुमान सेना पार्टी द्वारा 27 दिसम्बर 1999 से पृथक चम्बल प्रदेश गठन की मांग की गई है। चौबे ने बताया कि पृथक चम्बल प्रदेश गठन की मांग एक ऐसी जनकल्याणकारी मांग है। लखनऊ उत्तरप्रदेश से भोपाल मध्यप्रदेश से और राजस्थान से बीहड़ी बाहुल्य सीमावर्ती अंतिम छोर पर बसे हैं और चम्बलांचल में तीन-तीन प्रदेशों की सीमा है। इन 22 जिलों को मिलाकर पृथक चम्बल प्रदेश गठन की मांग की गई है। इन जिलों में विकास के नाम से केन्द्र सस्कार राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजना आती रहीं और आते-आते दम तोड़ती रहीं। चम्बल नदी के न उस पार, न इस पार योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिला, लाभ से वंचित रहीं।
चौबे ने बताया कि अभी तक प्रदेश के विभाजन करके पृथक गठन होते रहे है। छत्तीसगढ़ हो, झारखण्ड हो या उत्तराखण्ड या तेलंगाना हो। यह सभी एक राज्यस के टुकड़े होकर पृथक प्रदेश गठन होते रहे है। पृथक चम्बल प्रदेश गठन की एक ऐसी जनकल्याणकारी मांग है जिसमें उत्तरप्रदेश से आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, जालौन, झाँसी और ललितपुर। मध्यप्रदेश से गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, दतिया, ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर और भिण्ड। राजस्थान से-धौलपुर, करौली, सवाई माधौपुर, कोटा, बारा, झालाबाड़ जिलों को चम्बल प्रदेश गठन की मांग में शामिल किया गया है।
चौबे ने बताया कि पृथक चम्बल प्रदेश गठन की मांग के समर्थन में चम्बल कलश रथयात्रा निकाली जा रही है। दूर दराज के ग्रामों में घर-घर सुख शान्ति का संदेश देने पहुँच रही है, और जनता पूछ रहीं है चम्बल प्रदेश गठन में देरी क्यों जबकि जग में सुन्दर है दो नाम नरेन्द्र मोदी पंडित राहुल गाँधी है नाम…


