– वायु, जल एवं भूमि प्रदूषण की आशंका से ग्रामीणों में चिंता, उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज
भिण्ड, 16 जून। प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र में संचालित विभिन्न औद्योगिक इकाईयों द्वारा पर्यावरणीय मानकों के कथित उल्लंघन एवं प्रदूषण नियंत्रण तंत्र की प्रभावी निगरानी के अभाव को लेकर क्षेत्र में गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों, किसानों एवं सामाजिक संगठनों का आरोप है कि औद्योगिक गतिविधियों के कारण क्षेत्र में वायु, जल एवं भूमि प्रदूषण का खतरा लगातार बढ़ रहा है, जबकि संबंधित विभागों द्वारा अपेक्षित स्तर पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले उत्सर्जन, औद्योगिक अपशिष्ट एवं अन्य प्रदूषक तत्वों की नियमित एवं पारदर्शी निगरानी नहीं होने से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका बढ़ती जा रही है। यदि समय रहते स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन एवं नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में यह समस्या जनस्वास्थ्य, कृषि उत्पादन एवं प्राकृतिक संसाधनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
पर्यावरण संरक्षण कानूनों के पालन पर उठ रहे प्रश्न
क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि कुछ औद्योगिक इकाईयों द्वारा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के प्रावधानों का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सभी उद्योग निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं तो संबंधित विभागों को निरीक्षण एवं मॉनिटरिंग रिपोर्ट सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
भूजल एवं कृषि भूमि पर संभावित खतरे की आशंका
ग्रामीणों एवं किसानों का आरोप है कि औद्योगिक गतिविधियों से उत्पन्न अपशिष्टों के समुचित प्रबंधन की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि औद्योगिक अपशिष्टों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं किया गया तो भूजल स्त्रोतों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसके अतिरिक्त कृषि भूमि की उत्पादकता एवं मिट्टी की उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। किसानों ने मांग की है कि क्षेत्र के जल स्त्रोतों, नलकृपों एवं कृषि भूमि की मिट्टी के नमूनों की किसी स्वतंत्र एवं मान्यता प्राप्त एजेंसी से जांच कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मालनपुर जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की जाने वाली निगरानी, निरीक्षण एवं प्रवर्तन कार्रवाई अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं देती। लोगों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण, सघन मॉनिटरिंग एवं मानकों के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाती तो क्षेत्र में प्रदूषण को लेकर इतनी व्यापक शिकायतें सामने नहीं आतीं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि क्षेत्र में संचालित उद्योगों के उत्सर्जन, अपशिष्ट जल प्रबंधन एवं पर्यावरणीय अनुपालन की वास्तविक स्थिति को लेकर आमजन को पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती। इससे पारदर्शिता एवं जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
निरीक्षण रिपोर्ट एवं कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करने की मांग
क्षेत्रीय नागरिकों ने मांग की है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यह सार्वजनिक करे कि पिछले पांच वर्षों में मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र की कितनी औद्योगिक इकाईयों का निरीक्षण किया गया, कितने मामलों में पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन पाया गया तथा संबंधित इकाइयों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई। लोगों का कहना है कि जनहित एवं पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शासन एवं प्रशासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
जनस्वास्थ्य पर पड़ सकते हैं गंभीर प्रभाव
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में सांस संबंधी बीमारियां, एलर्जी, आंखों में जलन, त्वचा रोग एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। हालांकि इन शिकायतों एवं औद्योगिक प्रदूषण के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि बढ़ते प्रदूषण को लेकर स्वास्थ्य विभाग को भी व्यापक सर्वेक्षण एवं अध्ययन कराना चाहिए।
एनजीटी एवं उच्च स्तरीय जांच की उठी मांग
सामाजिक संगठनों एवं जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र की पर्यावरणीय स्थिति का मूल्यांकन किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति, राज्य स्तरीय जांच दल अथवा आवश्यक होने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कराया जाए। साथ ही यदि किसी औद्योगिक इकाई अथवा विभागीय अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन आवश्यक
क्षेत्रवासियों का कहना है कि औद्योगिक विकास रोजगार एवं आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक है, किंतु संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण में जीवन यापन करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। इसलिए औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, जनस्वास्थ्य सुरक्षा एवं विधिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाना भी उतना ही आवश्यक है।
इस संबंध में मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डीवीएस जाटव से उनका पक्ष जानने हेतु दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु समाचार लिखे जाने तक उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। यदि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन अथवा संबंधित औद्योगिक इकाईयों का कोई पक्ष अथवा स्पष्टीकरण प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।


