भिण्ड, 28 नवम्बर। सहचार्य से ओत-प्रोत सहयोग द्वारा राष्ट्रसेवा का संस्कार ही भारतीय संस्कृति है, जो कि विश्व में अद्वितीय है। हमारे संस्कार ही हमारी संस्कृति को परिलक्षित करते हैं। हमें सदैव अपने संस्कार याद रखकर ही आचरण करना चाहिए। यह बात हाउसिंग कॉलोनी स्थित निजी कोचिंग पर हम फाउण्डेशन भारत द्वारा आयोजित हमारी संस्कृति हमारे संस्कार विषय पर संगोष्ठी एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता के अवसर पर फाउण्डेशन के प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर इकबाल अली ने कही। इस अवसर पर सौरव भदौरिया, राघवेन्द्र यादव, सौरभ यादव, अनुज बंसल, सार्थक, गोपाल शर्मा आदि उपस्थित थे।
हम फाउण्डेशन के प्रांतीय वेतन महामंत्री शैलेश सक्सेना ने कहा कि हमारी संस्कृति और संस्कार एक दूसरे के पूरक हैं, जहां संस्कृति जीवनशैली को आकर देती है, वहीं संस्कार उसे संवारते हैं, आज के समय में भी अपनी संस्कृति और संस्कारों को अपनाना जरूरी है, क्योंकि यही हमें समाज में सही में रास्ता दिखाते हैं। संगोष्ठी में स्वती सक्सैना, अंजली राजपूत, माधव राजपूत, मनोज यादव, कांति भदौरिया सहित एक दर्जन विद्यार्थियों ने अपने विचारों से भारतीय संस्कृति के बारे में विस्तार से अवगत कराया और लगभग आधा सैकड़ा विद्यार्थियों ने निबंध लेखन में सहयोगिता की।
Saturday, April 11
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