भिण्ड, 28 नवम्बर। प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रांति के महानायक शहीद कोतवाल धनसिंह गुर्जर की जयंती बायपास रोड बीटीआई तिराहे के पास स्थित गुर्जर छात्रावास में धूमधाम के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में संगोष्ठी का आयोजन एवं पौधारोपण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कोतवाल धनसिंह गुर्जर के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर माल्यार्पण के साथ हुआ। उपस्थित जनों ने 1857 की क्रांति के प्रमुख नायक के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देकर उन्हें नमन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजेन्द्र सिंह पटेल पावई आदर्श ने की, वहीं सेवानिवृत शिक्षक शिशुभान सिंह राजावत, रामनरेश पाराशर, कवि सतेन्द्र सिंह कुशवाह बबेड़ी एवं सरदार सिंह कामर विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे।
गुर्जर समाज समिति भिण्ड के उपाध्यक्ष ने स्वागत भाषण करते हुए बताया कि धन सिंह कोतवाल एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनका जन्म 27 नवंबर 1814 में मेरठ के पांचली गांव में हुआ था। वे मेरठ के सदर थाने में कोतवाल के पद पर तैनात थे। उन्होंने 10 मई 1857 में उन्होंने ब्रिटिश सरकार अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका और मेरठ में विद्रोह का नेतृत्व किया। अपने अदम्य साहस,शौर्य और वीरता से उन्होंने अग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए। मुख्य आरोपी मानते हुए षड्यंत्र पूर्वक अंग्रेजो ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया और कठोर यातनाएं और 4 जुलाई 1875 को मेरठ के एक चौराहे पर उन्हें फांसी पर लटका दिया। कोतवाल धन सिंह का साहस और शौर्य और देश के प्रति समर्पण आज भी जिंदा है, वो हमेशा के लिए अमर हो गए।
विशिष्ट अतिथि शिशुभान सिंह राजावत ने कहा कि वीर पुरुष किसी जाति, समुदाय या क्षेत्र विशेष के नहीं होते, वे सर्व समाज के नायक होते हैं। उनकी कुर्वानी के लिए पूरा राष्ट्र उन्हें नमन करता है। उन्होंने 1857 की क्रांति में जो महत्वपूर्ण योगदान दिया, उनके के त्याग और बलिदान के लिए भारत हम सब सदैव ऋणी रहेंगे। अध्यक्षता कर रहे राजेन्द्र सिंह पटेल ने कहा हम सब उन सभी महान क्रांतिकारियों के ऋणी है, जिन्होंने देश को आजाद कराया, कोतवाल धनसिंह गुर्जर उन्ही में से प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के एक महानायक रहे हैं। उनकी जयंती पर हम संगठित होकर एकजुटता के साथ देश की रक्षा के लिए तत्पर रहने का संकल्प लेते हैं कि हमारे महापुरुषों ने जो आदर्श स्थापित किए उन पर चलते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। कार्यक्रम मेंबर नरेश पाराशर, देवेन्द्र सिंह गुर्जर, उमेश सिंह और धीरज सिंह गुर्जर ने भी अपने विचार रखे।
कवि सतेन्द्र सिंह कुशवाह ने शहीद को काव्यमय श्रद्धांजलि दी। अंत में समिति की ओर से राजेन्द्र सिंह गुर्जर ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रकर्ष फाउण्डेशन और गुर्जर समाज समिति द्वारा संयुक्त रूप से छात्रावास परिसर में पौधारोपण किया। कार्यक्रम में मोहन सिंह राजावत, सुरेश सिंह, सरदार सिंह महेवा, सर्जन सिंह, बादशाह गुर्जर, मोनू राजावत, हिमांशु कराटे, नीतू सिंह, जवान सिंह कामर, शिवेन्द्र सिंह गुर्जर, प्रशांत आदि मौजूद रहे।
Monday, September 28
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