– संविधान दिवस पर सुप्रयास ने आयोजित की संगोष्ठी
भिण्ड, 27 नवम्बर। हमारा संविधान दुनिया का सर्वश्रेष्ठ संविधान है और इसमें अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के निर्वाह को भी महत्वपूर्ण माना गया है। आज भारतीय संविधान के अधिनियमन की वर्षगांठ है। 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था और यह 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ था। संविधान दिवस का उद्देश्य भारतीय संविधान के महत्व और इसके द्वारा दिए गए अधिकारों, कर्तव्यों और सिद्धांतों के बारे में लोगों को जागरूक करना है। यह बात समाजसेवी शैलेश नारायण सिंह कुशवाह ने सामाजिक संस्था सुप्रयास द्वारा ऑस्टिन उमावि भिण्ड में आयोजित संगोष्ठी में कही।
उन्होंने कहा कि अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जहां अधिकार वे सुविधाएं और स्वतंत्रताएं हैं, जो किसी व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए मिलती हैं, वहीं कर्तव्य वे नैतिक और कानूनी दायित्व हैं जिन्हें व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के प्रति निभाना होता है। अधिकारों और कर्तव्यों के बीच एक घनिष्ठ संबंध है; अधिकार कर्तव्यों के पालन पर निर्भर करते हैं और कर्तव्यों के बिना अधिकार निरर्थक हो सकते हैं। कर्तव्य दो प्रकार के होते हैं कानूनी और नैतिक। कानूनी कर्तव्य वे हैं जिनका पालन न करने पर दण्ड हो सकता है, जबकि नैतिक कर्तव्य अक्सर अंतरात्मा की आवाज से प्रेरित होते हैं और हर नागरिक से उनके पालन की अपेक्षा की जाती है।
संगोष्ठी में सुप्रयास के सचिव डॉ. मनोज जैन ने कहा कि जब हमारा स्वाधीनता संग्राम चल रहा था तब दुनिया में कई विचारधाराएं कम कर रही थीं, उसे समय साम्यवादी विचारक पूरी दुनिया पर छाए हुए थे एवं उन विचारों का असर भारत के स्वाधीनता संग्राम पर भी था। हमारे स्वाधीनता के नायकों के मन में अपने देश की जनता को शोषण और दमन से मुक्ति दिलाने का संकल्प था और यही कारण था कि जब हमारे संविधान का निर्माण हुआ तो हमने कर्तव्य से अधिक अधिकारों को महत्व दिया। जबकि हमारे सनातन संस्कृति कर्तव्य आधारित संस्कृति थी। अब वर्तमान में हमको अधिकार और कर्तव्य दोनों को एक सामान रखकर कार्य करना होगा। अधिकार और कर्तव्य एक दूसरे के पूरक हैं राज्य का कर्तव्य नागरिक का अधिकार है और नागरिक का कर्तव्य राज्य का अधिकार है। जब दोनों पहलुओं पर समान रूप में काम किया जाएगा तभी देश प्रगति के रास्ते पर और आगे बढ़ेगा।
अंत में विद्यालय के प्राचार्य शैलेन्द्र शर्मा ने कहा कि अधिकार वे सुविधाएं और स्वतंत्रताएं हैं जो एक व्यक्ति को समाज और संविधान द्वारा प्राप्त होती हैं ताकि वह अपना जीवन सम्मानपूर्वक जी सके। वहीं कर्तव्य वे नैतिक और कानूनी दायित्व हैं जिन्हें हर व्यक्ति को अपने समाज, राष्ट्र और अन्य व्यक्तियों के प्रति निभाना चाहिए। कानून और राज्य अधिकारों के संरक्षक होते हैं और बदले में नागरिकों से कानून का पालन करने की अपेक्षा की जाती है, जो एक कर्तव्य है। संगोष्ठी में रणजीत सिंह चौहान, अनिल मौर्य, सत्यपाल अगरिया, आकाश गौतम ने भी भाग लिया।


