भिण्ड। मप्र सरकार एक तरफ स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ भिण्ड जिला अस्पताल में बैठे कुछ अधिकारी-कर्मचारी सरकार की मंशा पर पलीता लगा रहे हैं। मामला जिला अस्पताल में पदस्थ स्टाफ नर्सों के साथ हो रहे अन्याय से जुड़ा है।
बताया गया है कि मप्र शासन के वित्त विभाग के आदेश में नवनियुक्त कर्मचारियों को 3 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में 70, 80 व 90 फीसदी के मान से वेतन दिया जाता है और 3 वर्ष पूर्ण होने पर 100 फीसदी सातवां वेतनमान और तीन साल का एरियर एक मुश्त दिया जाता है। लेकिन वर्ष 2022 में नियुक्त होकर आई करीब 13 स्टाफ नर्सों का परिवीक्षा काल 30 नवंबर 2025 को पूर्ण हो गया और दिसंबर 2025 से उन्हें 100 फीसदी वेतन मिलना चाहिए था। लेकिन 9 महीने बाद भी उन्हें पुराने वेतन पर ही काम कराया जा रहा है। आरोप हैं कि अस्पताल की स्थापना शाखा में लिपिक ने उनकी फाइलों को दबा रखा है। चढ़ोत्तरी चढ़ाने का दबाव बनाया जा रहा है।
सिविल सर्जन ने भी साध रखी चुप्पी
इस पूरे मामले में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरके मिश्रा ने चुप्पी साध रखी है। नर्सों ने बताया कि उन्होंने कई बार लिखित आवेदन सिविल सर्जन को दिया, लेकिन आज तक एक भी आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सूत्रों की मानें तो बिना सिविल सर्जन के हस्ताक्षर के कोई भी वेतन बिल पास नहीं हो सकता। ऐसे में 9 महीने तक फाइल का लटका रहना यह दर्शाता है कि साहब की भी इसमें मौन सहमति है।
अन्य जिलों में बट चुका है पैसा
बताया गया इस बैच की नर्सें जो ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी, दतिया में पदस्थ हैं, उन्हें मार्च-अप्रैल 2026 में ही 100 फीसदी वेतन और एरियर का भुगतान हो चुका है। सिर्फ भिंड जिला अस्पताल ही ऐसा है जहां अभी तक भुगतान नहीं हुआ।
इनका कहना है:
‘रीजनल कार्यालय के लिए पत्र भेज दिया है वहां से अनुमोदन के बाद हो जाएगा।
डॉ. आरके मिश्रा, सिविल सर्जन भिण्ड
Sunday, September 27
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