भिण्ड ब्यूरो – प्रशासनिक सेवा में अधिकारियों का आना-जाना एक निरंतर प्रक्रिया है, लेकिन कुछ अधिकारी अपने फैसलों से ज्यादा अपनी कार्यशैली और मानवीय दृष्टिकोण के कारण जनमानस के दिलों में गहरी छाप छोड़ जाते हैं। भिण्ड जिले के वर्तमान कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा का कार्यकाल इन दिनों जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। उनकी पहचान केवल प्रशासनिक आदेश जारी करने वाले अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को धैर्य से सुनने वाले एक संवेदनशील जनसेवक के रूप में बन रही है।
सरलता, शालीनता और संवेदनशीलता ही असली पूंजी
‘किरोड़ी’ शब्द का शाब्दिक अर्थ भले ही करोड़ों की संपन्नता से जोड़ा जाता हो, लेकिन मीणा की असली संपन्नता उनकी सरलता, कर्मठता और इंसानियत है। उनके चेहरे की शांति, व्यवहार की विनम्रता और बात करने का सहज अंदाज़ हर किसी को आकर्षित करता है। आम आदमी बिना किसी भय और संकोच के अपनी बात उनके सामने रख पाता है।
कलेक्टर कोर्ट में अनुकरणीय कार्यशैली
कलेक्टर न्यायालय में उनकी कार्यशैली विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करती है। न्यायालय की गरिमा बनाए रखते हुए शांत भाव से हर प्रकरण को सुनना, दस्तावेजों का स्वयं बारीकी से अवलोकन करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। घंटों काम करने के बावजूद उनके व्यवहार में कभी झुंझलाहट या अनावश्यक जल्दबाजी दिखाई नहीं देती। विपरीत परिस्थितियों में भी क्रोध पर नियंत्रण और व्यवहार में संयम बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
कुर्सी छोड़कर गांव की पगडंडियों तक पहुंचे
किसी अधिकारी की संवेदनशीलता का वास्तविक परिचय कार्यालय से बाहर निकलकर मिलता है। कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा लगातार ग्रामीण अंचलों का भ्रमण कर रहे हैं। कीचड़ भरे रास्तों और कठिन परिस्थितियों की परवाह किए बिना वे ग्रामीणों के बीच पहुंचते हैं, ज़मीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते हैं और उनके त्वरित निराकरण का प्रयास करते हैं। यह प्रशासनिक औपचारिकता से परे जनता और प्रशासन के बीच की दूरी घटाने की एक ईमानदार पहल है।
नाम के ही नहीं, काम और जुबान के भी धनी
किसी पद की चमक अस्थाई होती है, लेकिन अधिकारी का व्यवहार लंबे समय तक याद रखा जाता है। आम आदमी हो या मातहत कर्मचारी, सभी के साथ उनका संवाद समान रूप से शालीन रहता है। भिण्ड में उनका कार्यकाल चाहे जितना भी रहे, लेकिन यह तय है कि उन्होंने अपनी कार्यशैली, अनुशासन और मानवीय संवेदनाओं से न केवल कलेक्टर पद की गरिमा बढ़ाई है, बल्कि जिले के लोगों का अटूट विश्वास और सम्मान भी हासिल किया है।
Wednesday, September 30
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