लहार/भिण्ड — थाना लहार पुलिस ने नाबालिग बालिका की निर्मम हत्या करने और शव को पानी भरे कुएं में फेंकने वाले आरोपी—बालिका की मां तथा उसके प्रेमी—को गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई की। घटना का खुलासा टीम व जिले की सतत मॉनिटरिंग व तकनीकी-साक्ष्य आधारित जांच के बाद हुआ, जिससे अंधे कत्ल का पर्दाफाश संभव हुआ।
मौके पर मिला क्षत-विक्षिप्त शव
घटना की शुरुआत 15 जून 2026 को ग्राम मेहरा बुजुर्ग के कोटवार मेघ सिंह परिहार द्वारा थाने को सूचना दिए जाने से हुई, जिसमें गांव में मोहन दौहरे के कुएं में पानी में पड़े एक अज्ञात शव की सूचना मिली। मौके पर पहुंचकर देहाती मर्ग (पोस्टमार्टेम) इंटीमेशन दर्ज कर शव को कुंए से बाहर निकाला गया। शव क्षत-विक्षिप्त और कीड़ों से प्रभावित पाया गया, जो लगभग 5-7 दिन पुराना प्रतीत हुआ। शिनाख्त हेतु शव की फोटो सोशल मीडिया पर प्रसारित कराई गई और परिवार व ग्रामीणों के सहयोग से पहचान कराई गई।
मौके और पोस्टमार्टेम रिपोर्ट ने हत्या की ओर इंगित किया
मृतिका की पहचान होने और पोस्टमार्टेम रिपोर्ट व डायाटम टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर स्पष्ट हुआ कि बालिका की मृत्यु स्वाभाविक नहीं थी। रिपोर्ट व अन्य चिकित्सीय-साक्ष्यों के अनुसार मृतिका की हत्या कर उसे पानी भरे कुएं में फेंका गया था। इस पर मर्ग दर्ज कर विवेचना आरम्भ की गई और मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक, थाना व एसडीओपी के मार्गदर्शन में मामले की मॉनिटरिंग की गई।
पुलिस टीम ने तकनीकी व साक्ष्य-आधारित जांच की
जांच के दौरान टीम ने सीडीआर टावर लोकेशन, तकनीकी साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया। शुरुआती दौर में मृतिका व आरोपियों दोनों की पहचान अज्ञात थी, लेकिन सोशल मीडिया पर शव की फोटो तथा तकनीकी ट्रेस के आधार पर सूचना जुटाई गई। जांच अधिकारी उनि. नरेंद्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने संदेह के आधार पर तलाश शुरू की। टीम ने पाया कि संदेही अपने मोबाइल का प्रयोग प्रत्यक्ष रूप से नहीं कर रहे थे और राहगीरों के फोन का उपयोग कर बात-चीत करते थे, जिससे उनकी लोकेशन छिपाने की कोशिश उजागर हुई।
गवाही व पूछताछ में हुआ खुलासा
मुखबिर की सूचना पर 15 अगस्त 2026 को आरोपियों—मां तथा प्रेमी—को ग्वालियर से हिरासत में लिया गया और थाना लहार लाया गया। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों द्वारा कोई ठोस जानकारी नहीं दी गयी और उन्होंने बच्ची के गायब होने की कोई रिपोर्ट भी दर्ज नहीं करवाई थी। दोनों घटना के दिन से फरार थे, जिससे उन पर शक गहरा गया। जब दोनों आरोपियों को अलग-अलग करके कड़ी पूछताछ की गयी तो वे टूट गए और घटना की सच्चाई स्वीकार कर ली।
हत्या की भयावह कहानी
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि घटना 6 जुलाई 2026 की है। आरोपियों ने कहा कि मृतिका नाना नरेश दौहरे के पास जाने के लिए जिद कर रही थी। उन्हें डर था कि बालिका घर जाकर उनके संबंधों व बातचीत के बारे में लोगों को बता देगी और गांव में उसका व उनके परिवार का बदनामी होगी। इस वजह से दोनों ने मिलकर हत्या की योजना बनाई। आरोपी प्रेमी ने बताया कि वे बालिका को पिंटू ठाकुर के खेत में बनी कोठी से नाना के घर छोड़ने के बहाने रात में लेकर गये। रात 9-10 बजे के बीच मोहन दौहरे के कुएं के पास बालिका को लिटाकर आरोपी प्रेमी ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी, जबकि उसकी मां ने हाथ-पैर पकड़कर सहायता की। बालिका की हत्या के बाद वे उसके कपड़े व चप्पल सहित शव को पानी भरे कुएं में फेंककर रात में ही गांव से फरार हो गये।
घटनास्थल पर वाहक-प्रक्रिया व वीडियो रेकॉर्डिंग
अरोपीयों के बताए स्थान पर टीम ने जाकर घटना स्थल की वीडियो ग्राफी कराई और उनके कथनों के अनुरूप साक्ष्य जुटाए। जांच के दौरान तकनीकी प्रमाण व गवाहों के बयान एक-दूसरे के अनुरूप पाए गये, जिससे अभियोग और स्पष्ट हुआ। दोनों आरोपियों के विरुद्ध धारा 103(1), 238(बी), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध क्रमांक 163/26 पंजीबद्ध कर विवेचना की गई और तफ्तीश के पश्चात उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस टीम व अधिकारियों की भूमिका
इस खुलेपण पर थाना लहार व जिले की पुलिस टीम ने संयुक्त रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उप पुलिस अधीक्षक शिव सिंह यादव, थाना प्रभारी लहार तथा उनि. नरेंद्र शर्मा के नेतृत्व में टीम ने जांच में लगन और तकनीकी दक्षता दिखाई। जांच में शामिल अन्य कर्मचारियों—उनि. मुन्शी लाल डोंगर, उनि. गीता सिकरवार, प्रआर0 624 अमित सिंह तोमर, आर0 917 लाखन जाट, आर0 1356 अक्षय दीक्षित, आर0 201 सुशील शर्मा, आर0 342 जीतू यादव, आर0 898 यदुवीर सिंह चौहान, आर० 82 महेन्द्र प्रताप सिंह यादव, आर0 1246 अवधेश अहिरवार, आर0 1120 शुभम पाल, आर0 337 अभिषेक सिंह, आर0 1250 विशाल मिश्रा, म0आ0 1293 बंदना खरे, म०आ० खुशबू राजौरिया, म०आ० रश्मि सहित साइबर सैल प्रभारी उनि० सत्यवीर सिंह व प्रआर० महेश सिंह की भी सराहनीय भूमिका रही। श्रीमान पुलिस अधीक्षक भिण्ड श्री सूरज कुमार वर्मा द्वारा लगातार मॉनिटरिंग तथा श्रीमान अति. पुलिस अधीक्षक प्रदीप पटेल व एसडीओपी लहार श्री प्रवीण त्रिपाठी के मार्गदर्शन में की गयी कार्रवाइयों की प्रशंसा की गयी है। पुलिस अधीक्षक ने इस सफलता के लिए टीम को पुरुस्कृत करने के निर्देश दिये हैं।
न्यायिक प्रक्रिया जारी
आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही न्यायिक प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। पुलिस ने मामले के सभी साक्ष्यों को रिकार्ड में संकलित कर मजबूत अभियोग प्रस्तुत करने की तैयारी कर ली है। स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील घटना के मद्देनजर उचित सुरक्षा व सामाजिक संवेदनशीलता बनाए रखने के निर्देश दिये हैं तथा पीड़ित परिवार को आवश्यक सहायता प्रदान करने की बात कही गयी है।
यह मामला गांव व जिले में शोक व रोष का कारण बना हुआ है। पुलिस की सतत कार्रवाई व समुदाय के सहयोग से उम्मीद है कि न्याय की प्रक्रिया शीघ्र पूरी होगी एवं इस प्रकार की घटनाओं पर रोक के लिए जागरूकता व कड़े कदम उठाए जाएंगे।


