भिण्ड ब्यूरो – लेह में दलाई लामा से भेंट का अवसर मिला। उनके सान्निध्य में करुणा, शांति और मानवता की बात सुनना मेरे लिए एक गहरा अनुभव रहा। उन्होंने स्नेहपूर्वक मुझे एक पुस्तक भी भेंट की। एक ऐसी स्मृति, जिसे मैं संजोकर रखूंगा। यह बात पूर्वमंत्री राकेश चौधरी के सुपुत्र भरत चौधरी ने लेह से लौटने के बात साझा की।
चंबल की धरती, भिण्ड की मिट्टी और यहां का सामाजिक जीवन मेरी जीवन चेतना की जड़ें हैं। उसी चंबल ने सिखाया है कि समाज में सबसे अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज को सुनना ही सार्वजनिक जीवन का पहला धर्म है। हिमालय की इस ऊंचाई पर खड़े होकर लगा कि भौगोलिक दूरियां भले हों, लेकिन चंबल के खेत-मजदूर से लेकर हिमालय के साधु तक भारत की आत्मा एक ही है। यह जीवन और जवानी वंचित और कमजोर के पक्ष में खड़े होने, बराबरी की लड़ाई लड़ने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने का माध्यम है। भिण्ड की मिट्टी से लेकर लेह के पहाड़ों तक—जनता, न्याय और इंसानियत के पक्ष में यात्रा जारी है।
Sunday, September 27
BREAKING
- गौरी किनारा मन्दिर में सोशल ग्रुप अजितनाथ ने की प्रभावना
- नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान का शानदार आगाज
- टीईटी परीक्षा को लेकर शिक्षकों का फूटा गुस्सा, कलेक्टर पर किया प्रदर्शन
- लला जैन के जूता गोदाम में लगी ,आग लाखों का नुकसान
- सड़क या गांव में आवारा घूम रहे गौवंश को नजदीकी गौशाला में भेजें : सीईओ
- गौरी सरोवर पर लगी बड़ी स्क्रीन पर छात्रों ने देखा राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज कार्यक्रम
- नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म देखेंगे भिण्ड, ग्वालियर और मुरैना जिले के संत
- शिविर में 364 आवेदन हुए प्राप्त, 328 का मौके पर हुआ निराकरण


