– राकेश अचल
नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में काम करते हुए आखिर पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का कीर्तिमान आखिर तोड़ दिया। मोदीजी बधाई के पात्र हैं, मैं उन्हें बधाई देता हूं, क्योंकि मोदीजी परम स्वतंत्र हैं। नेहरू जी परम स्वतंत्र नहीं थे, उन्हें साधने वाले तमाम लोग थे।
मोदीजी ने मप्र से राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट जीतने के लिए जिस ढंग से कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कराया है, उससे जाहिर हो गया है कि वे तिकड़म करने में नेहरू जी के भी बाप हैं। हारी हुई कांग्रेस अब मोदीजी पर भड़क रही है। कांग्रेस यदि नारद होती तो वही कहती जो नारद जी ने विष्णु जी के लिए कहा था। मोदीजी को परसंपदा अच्छी नहीं लगती। उन्हें कांग्रेस से विशेष ईर्ष्या और कपट है। उन्होंने शिव की जगह राम को बौराया और सत्ता सुंदरी का हरण कर लिया। पिछले 11 साल में मोदीजी ने अपने व्यवहार से प्रमणित किया है कि वे और उनकी पार्टी स्वार्थ साधक, कुटिल और सदा कपट व्यवहार करने वाले रहे हैं। वे परम स्वतंत्र हैं, उनके सिर पर कोई नहीं है। वे मनमानी पर आमादा हैं। उनके मन में विस्मय और हर्ष समान है। वे किसी का भी बुरा और किसी भी बुरे का भला कर सकते हैं। यानि डहकि डहकि परिचेहु सब काहू, अति असंक मन सदा उछाहू। उनके लिए करम प्रधान है। सुभासुभ कोई बाधा नहीं है। उन्हें अभी तक किसी ने साधा नहीं है। अब उन्होंने घर बैठे कांग्रेस को चुनौती दे दी है। अब उन्हें अपने कर्मों का फल अपने आप मिलेगा।
ये सही है कि अब तक निर्वाचित और सतत् प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने का पं. जवाहरलाल नेहरु का कीर्तिमान 4398 दिनों का था, जिसे 10 जून 2026 को मोदी जी ने अपने निर्बाध कार्यकाल के 4399 दिन पूरे कर नेहरू जी को पीछे छोड़ दिया है। आपको बता दूं कि नेहरू जी 13 मई 1952 को प्रधानमंत्री पद की कुर्सी पर बैठे और मृत्यु-पर्यन्त 27 मई 1964 तक इस पद पर रहे। जबकि मोदी जी 26 मई सन् 2014 को प्रधानमंत्री बने और आज 10 जून 2026 तक वे यथावत् इस कुर्सी पर आसीन हैं। नेहरू जी ने उच्च शिक्षा हेतु आईआईटी, एआईआईएमएस, आईआईएम आदि खुलवाए थे तो गरीबों के लिए सीटीआई। यह सच है कि निर्वाचित प्रधानमंत्री नेहरू जी के समय मन्दिर नहीं बने। मोदी जी ने मन्दिरों के आस-पास कोरीडोर बनवाए, प्रसाद की दुकानें खुलवाईं, अंधभक्त मण्डल बनाए। भक्त तो नेहरू के भी कम न थे, लेकिन वे आंखों वाले थे। उन्हें आंखें खोलकर रखने की छूट थी। मोदीजी किसी भी तरह से आंख वालों को बर्दाश्त नहीं करते। बहरहाल नेहरू की बराबरी मोदीजी कर नहीं सकते और नेहरू जी को मोदीजी की बराबरी की जरूरत नहीं है।


