– राकेश अचल
भाजपा ने 12 साल पहले देश से अच्छे दिन लाने का वादा किया था, उसे अब पूरा भी कर रही है। देश में रामराज स्थापना के बारहवें साल में भले ही कालाधन विदेशों से वापस न आया हो, भले ही महंगाई डायन पहले से ज्यादा सेहतमंद हो गई हो, लेकिन अच्छे दिन फिर भी आए। अब आपको दिखाई नहीं दे रहे तो आपकी गलती है।
देश में अच्छे दिन आने का सबसे बड़ा सबूत ये है कि नीट-यूजी परीक्षा के पेपर को तय जगह पहुंचाने के लिए ट्रक, वैन, कृरियर नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के विमान इस्तेमाल करने की बात होने लगी है। नीट-यूजीपरीक्षा रद्द होने के बाद 21 जून को दोबारा से कराई जा रही है। इस बार सुरक्षा का मुद्दा सबसे बड़ा है। सरकार अब पेपर लीक को लेकर इतनी सतर्क है कि भारतीय वायुसेना के विमानों से प्रश्नपत्रों के परिवहन के ऑप्शन पर गंभीरता से विचार कर रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हाई-लेवल बैठक हुई, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल थे। मीटिंग में चर्चा इस बात पर हुई कि कि नीट के प्रश्नपत्रों को सुरक्षित तरीके से एक जगह से दूसरी जगह कैसे पहुंचाया जाए। यानी इस बार लड़ाई सिर्फ परीक्षा कराने की नहीं है। असल चुनौती ये है कि परीक्षा बिना किसी गड़बड़ी के संपन्न हो जाए।
हमारे जमाने में नीट परीक्षा नहीं होती थी, अंकों के आधार पर ही चुनाव हो जाता था। हमारे अंक गांधी श्रेणी से ऊपर कभी आए नहीं इसलिए हम डॉक्टर की बजाय पत्रकार बन गए। मुझे याद आता है कि भारत में नीट यानि (राष्ट्रीय अहर्ता-प्रवेश परीक्षा) पहली बार 5 मई 2013 को आयोजित की गई थी। इसे मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एक समान राष्ट्रीय परीक्षा के रूप में शुरू किया गया था। इस बारे में 2010 में तत्कालीन भारतीय चिकित्सा परिषद ने एक राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा का प्रस्ताव रखा था। 5 मई 2013 को पहली नीट परीक्षा आयोजित हुई। 2014 और 2015 में यह परीक्षा नहीं हुई। 2016 से नीट देशभर में मेडिकल प्रवेश की मुख्य परीक्षा बन गई, जिसने एआईपीएमटी और अधिकांश अन्य मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं का स्थान ले लिया।
2026 में नीट के परचे लीक होने से पहले कभी भी सेना के इस्तेमाल करने पर विचार नहीं किया गया था। परचे सड़क और रेल मार्ग से ही परीक्षा केन्द्रों तक भेजे जाते रहे है। अब सोचा जा रहा है कि वायुसेना के विमान से पेपर सीधे सुरक्षित जगहों तक पहुंचाए जा सकते हैं, जिससे छेड़छाड़ की आशंका कम हो। वैसे अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ये प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने रखा जाना बांकी है।
आपको याद होगा कि पेपर लीक की वजह से करीब 22 लाख बच्चों को मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा। कुछ बच्चों ने तो आत्महत्या तक कर ली। इस राष्ट्रीय घोटाले में अब तक दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहमदनगर समेत कई शहरों में छापेमारी हुई और 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। नीट अब सिर्फ एक परीक्षा नहीं रही बल्कि अब यह मामला राजनीतिक मुद्दा भी बना है। पेपर लीक के मामले को विपक्ष ने शिक्षा मंत्रालय की विफलता बताया है। साथ ही विपक्ष अब नीट की पुन:परीक्षा की तैयारियों को लेकर भी सरकार पर तंज कस रहा है। पूर्व राज्यसभा सांसद और शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी कह रही हैं कि आंसर शीट को परीक्षा केन्द्रों से उठाने, उसे ओएसएम सर्वर पर अपलोड करने के लिए नेवी की सबमरीन का इस्तेमाल कीजिए।
बहरहाल अब हमारी सेनाएं सीमा के साथ आने वाले दिनों में नीट परीक्षा के प्रश्नपत्रों की ही नहीं अपितु जरूरत पड़ने पर डीजल-पेट्रोल, पीएनची, सीएनजी और राशन वितरण के लिए भी इस्तेमाल की जाए तो चोंकिए मत। अपने आपको सेना के संरक्षण में रखने के लिए तैयार कीजिए। भविष्य में सेना मतदान, श्रमदान, के काम भी आ सकती है, क्योंकि जिस ढंग से देश में अराजकता पांव पसार रही है वह सैन्य आधारित लोकतंत्र के ही संकेत दे रहा है।


