– राकेश अचल
मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायकों के दिन अच्छे नहीं चल रहे। कभी उनका चुनाव शून्य घोषित हो जाता है तो कभी अदालत से उन्हें जेल भेजने के आदेश जारी हो जाते हैं। यानि किसी न किसी के सिर पर खतरे की तलवार लटक रही है। ताजा मामला दतिया के कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती का है। ढाई दशक पुराने मामले में भाजपा नेता की एक याचिका पर चल रही सुनवाई के चलते एमपी एमएलए कोर्ट ने भारती को जेल की सजा सुना दी। गिरफ्तारी के आदेश भी दिए और तत्काल जमानत भी, अपील का वक्त भी।
इससे पहले श्योपुर की विजयपुर सीट से प्रदेश के वनमंत्री रामनिवास रावत को उपचुनाव में हराने वाले कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी को मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर खण्डपीठ ने शून्य घोषित अकरने के साथ ही रामनिवास रावत को रनर अप घोषित कर दिया था, लेकिन ऊपर की अदालत ने इस आदेश पर रोक लगा दी और मुकेश को बिना वेतन का विधायक बना दिया।
दतिया विधायक राजेन्द्र भारती और विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा भाजपा की आंखों की किरकिरी पहले दिन से हैं, क्योंकि दतिया में कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती ने भाजपा के दिग्गज नरोत्तम मिश्रा को हराया था। विजयपुर में सिंधिया विरोधी रामनिवास रावत की पराजय भी भाजपा हजम नहीं कर सकी। नतीजा भारती को भ्रष्टाचार के मामले में और मल्होत्रा को गलत हलफनामा देने के मामले में उलझाकर निबटाने की रणनीति अपनाई। मुकेश मल्होत्रा को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली हुई है और भारती सुप्रीम कोर्ट जाने वाले हैं।
आपको याद होगा कि 2018 में सत्ताच्युत हुई भाजपा ने 2020 में भाजपा में व्यापक दलबदल कराकर बिना चुनाव लड़े सत्ता हांसिल की थी। तब कांग्रेस के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगुवाई में 22 कांग्रेसी विधायक तोड़े गए थे। ये अभियान 2023 में बंफर जीत के बाद भी जारी है। बीना की कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे को भाजपा अपने पाले में शामिल कर चुकी है, लेकिन तकनीकी रूप से वे कांग्रेस में होने का दावा कर रही हैं, ताकि उनकी विधायकी बची रहे। भाजपा ने भोपाल के विधायक आरिफ मसूद और सिमरिया विधायक अभय मिश्रा पर भी तलवार लटका रखी है। मसूद और मिश्रा के खिलाफ अदालतों में मामले दर्ज हैं। मजे की बात ये है कि फर्जी जाता प्रमाण पत्र के आरोपी गौतम टेंटवाल और एक जज को फोन करने के मामले में अदालत की अवमानना का सामना कर रहे भाजपा विधायक संजय पाठक को बचाने में संगठन और सरकार पूरा कसबल लगा रही है।
आपको याद होगा कि पेड न्यूज के मामले में अपनी विधायकी गंवा चुके भाजपा के वरिष्ठ नेता सुप्रीम कोर्ट से मिली अस्थाई राहत का लाभ लेकर 2 विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उनके मामले में उच्चतम न्यायालय का फैसला आज तक नहीं आया। अब कोई उच्चतम न्यायालय से तो जबाब तलब कर नहीं सकता। समरथ को नहीं दोष गुसांई वाली बात है। भाजपा सरकार की बदनीयत का अनुमान आप इसी बात से लगा सकते हैं कि भारती के मामले में आधीरात को विधानसभा खोलकर केंचुआ को खत लिखकर दतिया सीट रिक्त करने का अनुरोध कर डाला, जबकि सबको पता है कि मामला अपील में जा रहा है। अब देखना होगा कि क्या भाजपा किश्तों में कांग्रेस विधायकों की संख्या इसी तरह कामयाब होगी या नहीं?


