– कथा व्यास बोले- शिव भक्ति बिना राम कथा का अधिकारी कोई नहीं, शिव कथा से ही आंखों से झरते हैं भक्ति के अश्रु
भिण्ड, 31 मई। बैरागपुरा कंकाली माता मन्दिर पर चल रही संगीतमय श्रीमद् रामकथा के चौथे दिन कथा व्यास स्वामी आशीषानंद महाराज ने शिव कथा और रामकथा के संबंध का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि शिव कथा के बिना राम कथा का रसपान संभव नहीं है।
महाराज ने बताया कि एक बार याज्ञवल्क्य महाराज तीर्थराज प्रयाग में भारद्वाज को कथा सुना रहे थे। भारद्वाज ने रामकथा पूछी थी, लेकिन याज्ञवल्क्य ने पहले उन्हें शिव कथा सुनाई। शिव कथा सुनते ही भारद्वाज की आंखों से अश्रु धारा बहने लगी, झर-झर आंसू झरने लगे।
शिव भक्ति ही राम कथा का आधार
कथा व्यास ने समझाया कि जो शिव कथा सुनता है, जिसकी शिव कथा में प्रीति है, शिव कथा सुनने के बाद उसकी आंखों से भक्ति प्रकट होकर झर-झर बहने लगती है। वही व्यक्ति राम कथा सुनने का अधिकारी है। याज्ञवल्क्य ने भारद्वाज से कहा- ‘पूछी थी राम कथा और हमने सुनाई शिव कथा। इतना प्रेम है तुम्हें शिव जी में। जिसका इस प्रकार शिव जी में प्रेम है, शिवजी में भक्ति है, वही तो राम कथा सुनने का अधिकारी है। उसी को राम कथा फल देने वाली है, उसी को राम कथा आनंद दे सकती है।
कैलाश पर शिव-पार्वती प्रसंग
महाराज ने बताया कि भोले बाबा मां पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर विराजमान हैं। जब पार्वती मां सती रूप में थीं तब भोलेनाथ ने उन्हें सामने का आसन दिया था। लेकिन जब उन्होंने पार्वती रूप में पाणिग्रहण किया तो आज अपने अंग में विराजमान कर लिया है। जैसे ही सती महारानी भोलेनाथ के अंगमें विराजमान हुईं, भोले बाबा ने उनका बड़ा आदर किया।
श्रद्धालुओं की भीड़
कथा में वार्ड पार्षद स्वदेश कुशवाह, रविरमन प्रजापति, रामलखन प्रजापति, रवि श्रीवास, धनीराम प्रजापति सहित तमाम श्रद्धालु मौजूद रहे। मन्दिर के पुजारी रामकिशोर भगत ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 2 से 6 बजे तक चल रही है।


