– राकेश अचल
ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच जंग अब एक महीने की हो चुकी है। खाड़ी की ये जंग अब अपना रंग दिखलाने लगी है। ये जंग भारत समेत दुनिया के बड़े हिस्से को प्रभावित कर रही है। इस जंग ने कहीं एकजुटता बढ़ाई है तो कहीं बिखराव भी पैदा किया है। युद्धरत देशों के अलावा भारत से लेकर ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, ब्राजील से श्रीलंका तक पर इस युद्ध ने बुरा असर डाला है। भारत में अभी पेट्रोल, डीजल, एलपीजी का संकट देख ही रहे हैं।
भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया में गेहूं की बुवाई ईरान युद्ध से प्रभावित है। किसान परेशान हैं क्योंकि खाद की कीमतें बढ़ी हैं। दुनिया की एक तिहाई खाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य से भेजी जाती है। भारत ही अपनी कुल खाद जर का 30 प्रतिशत आयात करता है। दक्षिण कोरिया में युद्ध ने लोगों को स्नान के लिए गर्म पानी का संकट खड़ा कर दिया है। दरअल देश को पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर ऊर्जा पश्चिम एशिया से मिलती है। ईरान युद्ध के चलते सप्लाई चेन टूट गई है। इसने दक्षिण कोरिया को मुश्किल में डाल दिया है। सरकार ने अपने लोगों से कम समय तक नहाने की अपील की है।
थाईलैंड में गर्मी के चलते एसी का इस्तेमाल अधिक होता है। थाईलेंड के प्रधानमंत्री ने छोटी आस्तीन वाली शर्ट पहनना शुरू किया है। उन्होंने सभी से ऐसा करने की अपील की है। वह संकट को देखते हुए एसी की जरूरत कम करना चाहते हैं। उन्होंने सरकारी दफ्तरों से ऊर्जा बचाने के लिए एयर कंडीशनर का इस्तेमाल घटाने को कहा है। फिलीपींस ने ऊर्जा संकट से निबटने के लिए सरकारी कर्मचारियों से लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करने को कहा है। इसकी जड़ में भी ईरान युद्ध है क्योंकि देश को पश्चिम एशिया से पहुंचने वाली सप्लाई रुकी हुई है। यहां तक कि मिस्र ने हफ्ते में पांच दिन खरीदारी के घंटे कम कर दिए हैं।बांग्लादेश के हवाई अड्डों पर कपड़ों के ढेर हैं। उड़ानें रद्द होने की वजह से कपड़ों का निर्यात बाधित है। ईरान और इजरायल के बीच चल रही मिसाइलों की वजह से बड़े इलाके में जहाज नहीं उड़ पा रहे हैं। इसने बांग्लादेश के रेडीमेट उद्योग से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
दुबई और दोहा जैसे कार्गो हब में बंद होने की वजह से दुनिया के अनेक देशों में कैंसर दवाओं पर संकट आ गया है, जिन्हें ठंडा रखना जरूरी है। इससे मरीजों और उनके परिवारों के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। खाड़ी की जंग के चलते आए दिन होने वाली पार्टी में लगने वाले गुब्बारे भी बाजार से गायब हो सकते हैं। गुब्बारों में भरी जाने वाली हीलियम का एक बड़ा उत्पादक कतर है, जो इस युद्ध से काफी ज्यादा प्रभावित है। पेट्रोकेमिकल से बने ट्रैक सूट ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच और महंगे हो सकते हैं।
ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी हितों को निशाना बनाया है। ईरान के मिसाइल हमलों के चलते बहरीन और सऊदी अरब में होने वाली फार्मूला-1 रेस रद्द कर दी गई है। यानी खेलों पर भी इस युद्ध का सीधा असर है युद्ध के चलते मनोरंजन जगत पर भी असर हो रहा है। शकीरा, क्रिस्टीना एगुइलेरा और अन्य कलाकारों ने सुरक्षा चिंताओं की वजह से इपने कॉन्सर्ट टाल दिए हैं। दुबई और खाड़ी के दूसरे शहरों में ये कार्यक्रम होने थे।
अमेरिका में घर खरीदना और महंगा हो गया है। ईरान में युद्ध छिड़ने के बाद तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी है। बढ़ती हुई महंगाई कई क्षेत्रों में डर पैदा कर रही है, जिससे मॉर्गेज की दरें बढ़ रही हैं। यानी अमेरिकियों की जेब पर भी ईरान युद्ध का असर हो रहा है। जानकारों का कहना है कि ईरान युद्ध के चलते चीनी महंगी हो सकती है। दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश ब्राजील में चीनी मिलों पर ऊर्जा की बढ़ी कीमतों का असर है। चीनी मिलें मौजूदा हालात को देखते हुए ज्यादा बायोफ्यूल बनाने की ओर रुख कर सकती हैं।
सोने के दामों में गिरावट-सोने की कीमतों में गिरावट आई है। सोने की कीमतें कई वजहों से गिर रही हैं। इनमें सट्टेबाज निवेशकों की ओर से सोने में किया गया निवेश निकालना भी शामिल है। आवागमन कम करने और ईंधन बचाने के लिए श्रीलंका ने बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया है। लाओस में अब स्कूल हफ्ते में तीन दिन खोलने की तैयारी कर ली गई है.।
खाड़ी की जंग सुरसा के मुख की तरह बढ़ती ही जा रही है। हनुमान की तरह अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने वाले अमेरिका को भी अब थकान होने लगी है। लगता है कि अब अमेरिका को ही अपनी लघुता स्वीकार कर ईरान के सामने युद्ध विराम का अभिनय करना पड़ेगा। अमेरिका की जनता भी जंग नहीं चाहती। लाखों की संख्या में लोगों ने सड़क पर निकलकर अपने राष्ट्रपति पर दबाब बनाने का प्रयास किया है। भारत में सरकार कोविड काल की तरह निकट भविष्य में कुछ अनुशासन घोषित करने की योजना बना रही है। मुमकिन है कि इसी हफ्ते इस बारे में औपचारिकता पूरी कर ली जाए।


