– राकेश अचल
पश्चिम एशिया संकट गहराने के साथ ही पंत प्रधान को आखिर टीम इंडिया की याद आ ही गई। संघीय ढांचे पर निरंतर हमलावर पंत प्रधान के मुंह से खाड़ी की जंग के समय टीम इंडिया की याद आने से ये प्रमाणित हो गया है कि संकट गहरा है और अकेले मोदीजी इससे पार नहीं पा सकते। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस टीम इंडिया से वर्चुअल मीटिंग की, ये टीम इंडिया मुख्यमंत्रियों की है।
मध्य एशिया में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के खतरे को देखते हुए बुलाई गई यह बैठक करीब दो घण्टे तक चली। इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को साफ कहा कि हमें टीम इंडिया की तरह काम करना है। सूत्रों के मुताबिक मोदी ने मीटिंग में यह भी कहा कि मौजूदा संकट की वजह से देश में कोई लॉकडाउन नहीं लगेगा।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की प्राथमिकता आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, एनर्जी सिक्योरिटी को सुनिश्चित करना और नागरिकों के हितों की रक्षा करना है। साथ ही उन्होंने सप्लाई चेन को मजबूत करने की भी बात कही। इसके लिए मोदी ने राज्यों से जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की। मोदी ने गलत सूचनाओं और अफवाहों के प्रसार के खिलाफ चेतावनी दी और सटीक और विश्वसनीय जानकारी के प्रसार पर जोर दिया है। मुख्यमंत्रियों ने भी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केन्द्र सरकार की तरफ से स्थिति से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की। मुख्यमंत्रियों ने भरोसा जताया है कि उनके राज्यों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता के साथ हालात सामान्य बने हुए हैं।
मजे की बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस आभासी बैठक में पश्चिम बंगाल, असम, केरल, पुंडुचेरी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हो सके, क्योंकि इन 5 राज्यों में चुनाव की वजह से आचार संहिता लागू है। जबकि आपात स्थिति में ये मुख्यमंत्री भी केंचुआ से अनुमति लेकर बैठक में आ सकते थे। राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई इस बैठक में मिडिल ईस्ट के तनाव और ईरान युद्ध के बीच ईंधन की सप्लाई, बढ़ती महंगाई और रसद व्यवस्था को दुरुस्त रखने पर गंभीर चर्चा हुई। सभी मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों की स्थिति और तैयारियों की जानकारी पीएम मोदी को दी ताकि वैश्विक संकट का असर आम जनता पर न पड़े।
इस उच्च स्तरीय आभासी बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, मध्य प्रदेश के डॉ.मोहन यादव, उत्तराखण्ड के पुष्कर सिंह धामी और छत्तीसगढ़ के विष्णु देव साय आंध्र से चंद्रबाबू नायडू, तेलंगाना से रेवंत रेड्डी, पंजाब से भगवंत मान और जम्मू-कश्मीर से उमर अब्दुल्ला, झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, गुजरात के भूपेन्द्र पटेल और महाराष्ट्र के देवेन्द्र फडणवीस ने भी चर्चा में हिस्सा लिया। मोदी ने कुछ दिन पहले ही देश को आगाह किया था कि मध्य पूर्व का यह संकट भारत के लिए लंबी मुसीबतें खड़ी कर सकता है। केन्द्र सरकार अपनी तरफ से हर मुमकिन कदम उठा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं को कामयाब बनाने की असली जिम्मेदारी राज्यों के कंधों पर है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस स्थिति की तुलना ठीक 6 साल पहले आई कोरोना महामारी से की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह कोविड-19 के दौरान केन्द्र और राज्यों ने ‘टीम इंडियाÓ बनकर काम किया था, आज फिर उसी जज्बे की जरूरत है। आपको याद होगा कि मार्च 2020 में जब पूरी दुनिया थम गई थी, तब पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ लगातार मीटिंग्स का सिलसिला शुरू किया था। आज जब मिडिल ईस्ट के युद्ध के कारण तेल और खाद की कीमतें बढ़ने और सप्लाई चेन टूटने का डर सता रहा है, तो मोदी का राज्यों को पुकारना दिखाता है कि वे भीतर से डरे हुए हैं। अन्यथा वे मुख्यमंत्रियों से सीधे मुंह बात नहीं करते। देर आए, दुरुस्त आए। जो हो रहा है वो फिलहाल शुभ है।


