– राकेश अचल
क्या हम अदावत के उस दौर में पहुंच गए हैं जहां पहले सियासत में दुश्मनी थी और अब धर्म भी उसी आग में झोंका जा रहा है? प्रयागराज के महाकुंभ और माघ मेले से शुरू हुआ विवाद अब कोर्ट के आदेश तक पहुंच गया है। एडीजे कोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर एफआईआर का निर्देश दिया है, सवाल उठता है- क्या यह महज कानूनी कार्रवाई है? या फिर सियासी टकराव का विस्तार?
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गिरफ्तारी की तलवार लटका दी गई है, किंतु वे पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। इधर उनके खिलाफ पोस्को के इस्तेमाल का बिस्मिल्लाह हुआ उधर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बोर्ड जारी कर दिया। इस बोर्ड में एक तरफ ‘गाय, सत्य, शंकराचार्य के साथ हूं’ लिखा गया है, जबकि दूसरी ओर ‘आय, सत्ता, मुख्यमंत्री के साथ हूं’ लिखा है। इस बोर्ड के जरिए गो-रक्षा को लेकर चल रही वैचारिक लड़ाई को प्रतीकात्मक रूप में दिखाने की कोशिश की गई है।
उप्र की सरकार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नहीं बल्कि कालनेमि मानती है। खुद उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को कालनेमि कहा था, अलबत्ता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुकेश अंबानी के यहां एक समारोह में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से आशीर्वाद ले चुके हैं। मजे की बात ये है कि मुख योगी आदित्य नाथ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नहीं मानते तो शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को योगी नहीं मानते। दोनों के बीच की अदावत अब धर्म और सत्ता के बीच का टकराव बन चुकी है। आपको याद दिला दूं कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेवरानंद के शंकराचार्य होने को भी सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी गई है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शुरू से ही आरएसएस और भाजपा की आंख की किरकिरी रहे हैं। वे भाजपा, प्रधानमंत्री और उप्र के मुख्यमंत्री के फैसलों और आचरण को लेकर हमेशा आक्रामक रहे हैं। अयोध्या में राम मन्दिर के शिलान्यास, उदघाटन और प्राण प्रतिष्ठा समारोहों को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीन-मेख निकाले, विरोध किया। प्रयागराज के महाकुंभ में भगदड़ में 30 लोगों की मौत के लिए उप्र के मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराया था। अभी माघ मेले में पालकी से स्नान विवाद के बाद उप्र सरकार के इशा पर शंकराचार्य के साथ धक्का मुक्की हुई। विरोध में शंकराचार्य ने दस दिन अनशन किया था और बिना स्नान के आ गए थे। उन्होंने प्रयागराज से लौटते ही योगी सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान कर दिया था।
अब अपने खिलाफ पोस्को के तहत एफआईआर दर्ज होने के अदालती आदेश के फौरन बाद शंकराचार्य की ओर से जारी किए गए बोर्ड के शीर्षक में लिखा है- ‘गो रक्षा के इस धर्मयुद्ध में मैं तो…’ इसे दो हिस्सों में बांटा गया है। एक तरफ ‘गाय, सत्य, शंकराचार्य के साथ हूं’ लिखा है, जबकि दूसरी ओर ‘आय, सत्ता, मुख्यमंत्री के साथ हूं’ लिखा गया है। खास बात यह है कि इस दूसरे हिस्से में सबसे पहले रवीन्द्र पुरी महाराज की तस्वीर लगाई गई है।
दरअसल, अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवीन्द्र पुरी महाराज ने हाल ही में संभल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य पर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि अविमुक्तेश्वरानंद एजेंडा चला रहे हैं और किसी भी बड़े अखाड़े या संत परिषद का समर्थन उन्हें प्राप्त नहीं है। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद को सरकार, खासकर योगी आदित्यनाथ के साथ बताया था।
इस मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि हमने बिल्कुल चिन्हित कर लिया, उनके वक्तव्य को जान लिया। जान कर उनको खड़ा कर दिया कि आप मुख्यमंत्री के साथ हैं। उनका जो कथन है, उसके अनुसार उनका फोटो हमने उस तरफ रख दिया। तो अब स्पष्टता के साथ कम से कम पूरे सनातन धर्मी जनता को ये पता चल गया कि गौ माता की रक्षा के लिए आंदोलन चल रहा था, जब ये युद्ध लड़ा जा रहा था, उस समय यह सत्ता के साथ थे।
यह पूरा विवाद शिखा, बटुकों के सम्मान और गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग से जुड़ा हुआ है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 11 मार्च को लखनऊ कूच करने का ऐलान कर चुके हैं, जिसे लेकर सियासी और धार्मिक हलकों में हलचल बनी हुई है। शिखा विवाद से शुरू हुआ संत समाज का टकराव अब खुलकर वैचारिक संघर्ष में बदलता नजर आ रहा है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ‘धर्म युद्ध बोर्ड’ की घोषणा की है। यानी यह लड़ाई अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं दिख रही। इस बोर्ड में प्रतीकात्मक रूप से संत समाज और सत्ता के बीच विभाजन रेखा खींची गई है।
अब देखना ये है कि धर्म और सत्ता के बीच टकराव में क्या मोड़ आता है? क्या शंकराचार्य को भाजपा सरकार गिरफ्तार कराती है या फिर यहां भी डोनाल्ड ट्रंप को सीज फायर के लिए दोनों के बीच कूदना पड़ेगा, क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री तो मौन हैं।


