– सीटू की राष्ट्रीय हड़ताल 12 फरवरी को
भिण्ड, 08 फरवरी। देश आजाद हुआ तो आजाद भारत में सरकार द्वारा लोगों को पकड़ पकड़ कर शासकीय विभागों में स्थाई रोजगार दिए आजादी के तीन दशक तक सरकार द्वारा नए नए शासकीय विभागों की स्थापना हो रही थी, जिसमें जनता को रोजगार मिल रहा था। दूसरा सरकार ने ही श्रमिकों कर्मचारियों के हक अधिकारों की रक्षा के लिए श्रम कानून श्रम न्यायालय भी बनाए थे, 1975 से अस्थाई भर्तियां शुरू हुईं 240 दिन नियमित काम करने वालों को सरकार स्थाई कर्मचारी घोषित कर देती थी। लेकिन योजना कर्मियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, आशा, ऊषा सयोगिनी सहित अन्य योजना कर्मियों को स्थाई कर्मचारी घोषित नहीं किया है। यह बात आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका एकता यूनियन सीटू की जिला अध्यक्ष साधना भदौरिया ने रौन परियोजना में रविवार को आयोजित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा, ऊषा की संयुक्त बैठक में कही।
उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अभी भी मानदेय और प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, योजना कर्मियों से एक से अधिक काम एक ही दिन में सरकारों द्वारा लिए जाते हैं, लेकिन प्रति माह न मानदेय मिलता है और न प्रोत्साहन राशि। लेकिन सांसदों और विधायकों को प्रति माह वेतन भुगतान हो सकता है तो फिर योजना कर्मियों के लिए भी प्रति माह मानदेय मिलना चाहिए।
सीटू जिला महासचिव अनिल दौनेरिया ने कहा कि सरकारों की नीतियों के कारण स्थाई रोजगार के अवसर सिकुड़ रहे हैं, क्योंकि शासकीय विभागों में तीन दशकों से कोई भर्तियां नहीं हुई है देश के नेता मंत्री मंडल में स्वीकृत मंत्री पदों से अधिक लोगों को मंत्री बना रहे हैं, जनता का स्थाई रोजगार गिरते गिरते संविदा अतिथि अग्निवीर आउटसोर्स ठेका से होते हुए फिक्स टाइम तक आ गया है। कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के वाद पेंशन बंद है, फिर सांसदों, विधायकों, राज्यपालों की भी बंद होनी चाहिए, क्योंकि देश पर कर्ज बढ़ रहा है।
एक तरफ श्रमिकों कर्मचारियों द्वारा अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने वाले कानूनों को बचाने के लिए है, दूसरी तरफ सरकार द्वारा जनता पर थोपी जा रही जनविरोधी नीतियों को रोकना है। 12 फरवरी को दोपहर 12 बजे लोक निर्माण विभाग इटावा रोड से जलूश शुरू होगा जो जिलाधीश कार्यालय पर प्रदर्शन कर श्रम विरोधी नीतियों को वापस लेने की मांग करेगा।


