– भिण्ड नगर में विराट हिन्दू सम्मेलन आयोजित, हजारों श्रद्धालु उमड़े
– भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ आयोजन का शुभारंभ, गूंजे सनातन संस्कृति के स्वर
भिण्ड, 29 जनवरी। शा. सांदिपनी विद्यालय क्र.2 के मैदान में गुरुवार को विराट हिन्दू सम्मेलन के आयोजन से भिण्ड नगर धर्म, आस्था और राष्ट्रभावना के रंग में ओतप्रोत नजर आया सम्मेलन में विभिन्न बस्तियों से आए हजारों लोगों की सहभागिता ने इसे अभूतपूर्व और यादगार बना दिया। आयोजन की शुरुआत नगर के विविध स्थानों निकाली गई भव्य कलश यात्रा के साथ हुई, जिसमें सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर श्रद्धापूर्वक भाग लिया। कलश यात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया, जिससे संपूर्ण नगर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया। कार्यक्रम स्थल पर मां भारती, तुलसी एवं गौ माता के विधिवत पूजन के साथ सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में बालक बालिकाओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम में विजयराम महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति सेवा, त्याग और मानवता का मार्ग दिखाती है। हिन्दुओं की एकता आज की महती आवश्यकता है उन्होंने कहा की सभी हिंदुओं को एक होकर के रहना चाहिए किसी भी प्रकार से जाति पातीं का भेद नहीं करना चाहिए। आज कल हिन्दू समाज को तोड़ने के लिए बहुत षड्यंत्र चलाए जा रहे हैं, इसलिए हमको बहुत ही जागृत अवस्था में रहकर के हिंदू समाज को एक करने के लिए काम करना चाहिए।
सशक्त और शक्तिशाली राष्ट्र भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर : धनराज
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में विभाग प्रचारक धनराज जी ने कहा कि हमें हिंदू होने पर गर्व होना चाहिए। हम विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता है। हमारे देश में जो हारा वह सिकंदर, जो जीता वही चंद्रगुप्त इस प्रकार का भाव होना चाहिए। हम वीरों की संताने हैं। हमारे पूर्वज चंद्रगुप्त, छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप जैसे प्रतापी राजा हुए। हमारे पूर्वज भगवान राम, कृष्ण, गौतम बुद्ध, महावीर, गुरु नानक जैसे महापुरुषों ने समाज को एक दिशा दी, एक संदेश दिया, एक होने का संदेश दिया। यह वह हिन्दू धर्म है जिसके अंदर बड़े-बड़े महापुरुष पैदा हुए, हिंदू धर्म को खत्म करने के कई प्रयास हुए लेकिन यह खत्म नहीं हुआ, इसके अंदर न जाने कितने शक, हूण, कुषाण, यवन आए और इसी में मिलकर के इसके होकर रह गए। यह वीरों की भूमि है इसके कई प्रमाण ऐसा देश के अंदर देखने को मिलते हैं।
उन्होंने रामायण के कई उदाहरण देते हुए समझाया कि हमको अपना जीवन भगवान राम जैसा बनाना चाहिए, जिन्होंने वंचितों को शोषितों को जाकर के गले से लगाया। हमको भी अपने सभी समाज बंधुओं को स्नेह और प्यार से अपने गले से लगा कर रखना है जाति पातीं का भेद बिल्कुल भूलना है। हम सभी भारत माता के पुत्र और पुत्रियां हैं, हम सब एक हैं, हम में से कोई अलग नहीं है। उन्होंने संघ की 100 वर्ष की यात्रा का दर्शन सभी हिन्दू समाज को कराया, उन्होंने बड़े सरल शब्दों में संघ की शुरुआत किस तरह से हुई किन किन परिस्थितियों से संघ को गुजरना पड़ा। उन्होंने हिन्दू समाज को सशक्त और संगठित रहने का आह्वान किया और कहा कि हिन्दू समाज को संगठित करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 1925 से लगातार व्यक्ति निर्माण के कार्य में लगा है और समाज के बीच में सकारात्मक परिवर्तन के लिए कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी महान परम्पराओं को पकड़कर चलना है।
पंच परिवर्तन से सशक्त राष्ट्र का निर्माण : परिणिता राजे
इस अवसर पर परिणिता राजे ने कहा कि संघ सामाजिक क्षेत्र में पंच परिवर्तन को लेकर समाज में चेतना का कार्य कर रहा है, हमें अपने पर्यावरण को सुरक्षित एवं संरक्षित रखना है, स्वदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल कर भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य करना है, भारत की गौरवशाली कुटुंब परंपरा को बनाए रखने एवं नागरिक अनुशासन का पालन करते हुए हमें अपने नागरिक कर्तव्यों का देशहित में सदैव पालन करना चाहिए। उन्होंने अपने उदबोधन में राष्ट्र और मातृ भाषा को राष्ट्र की पहचान बताते हुए कुटुम्ब व्यवस्था सुदृढ़ और संस्कारित करने हेतु मातृ शक्ति का आह्वान किया
कार्यक्रम में देवेन्द्र अरोरा, महेन्द्र जैन, आसाराम दोहरे, रामबीर सिंह कुशवाह मंचासीन रहे। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। अंत में सभी उपस्थितजनों के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई।

