भिण्ड, 27 जनवरी। ग्राम अमाहा में जगत जननी मां रणकोशला देवी मां के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में समस्त धर्मप्रेमियों के जन सहयोग से चल रही श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा के चौथे दिन मंगलवार को कथा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा श्रवण कराई गई।
कथा वाचक साध्वी सुमन सरगम ने कहा कि परमात्मा ही परम सत्य है जब हमारी वृत्ति परमात्मा में लगेगी तो संसार गायब हो जाएगा प्रश्न यह है कि परमात्मा संसार में घुल मिले हैं तो संसार का नाश होने पर भी परमात्मा का नाश क्यों नहीं होता। इसका उत्तर यही है कि भगवान संसार से जुड़े भी हैं और अलग भी है आकाश में बादल रहता है और बादल के अंदर भी आकाश तत्व है बादल के गायब होने पर भी आकाश गायब नहीं होता इसी तरह संसार गायब होने पर भी परमात्मा गायब नहीं होते संसार की कोई भी वस्तु भगवान से अलग नहीं हे।
साध्वी सुमन सरगम ने कहा कि भाद्रपद कृष्णा अष्टमी तिथि की घनघोर अंधेरी आंधी रात को रोहणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृण ने जन्म लिया था। यह तिथि उसी शुभ घड़ी की याद दिलाती है। द्वापर युग में भोजवंशी राजा अग्रसेन मथुरा में राज्य करता था। उसके आततायी पुत्र कंश ने उसे गद्दी से उतार दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा। कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वासुदेव नामक यदुवंशी सरदार से हुआ था। एक समय कंस अपनी बहन देवकी को उसकी सुसराल पहुंचाने जा रहा था। रास्ते में आकाशवाडी हुई हे कंस, जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी में तेरा काल बसता है। इसी के गर्भ से उत्पन्न आठवां बालक तेरा बध करेगा। यह सुनकर कंस बासुदेव को मारने के लिए उद्धत हुआ। तब देवकी ने उससे विनयपूर्वक कहा कि मेरे गर्भ से जो संतान होगी, उसे मैं तुम्हारे सामने ला दूंगी। बहनोई को मारने से क्या लाभ है। कंस ने देवकी की बात मान ली और मथुरा वापस चला आया। उसने बासुदेव और देवकी को कारागृह में डाल दिया। बासुदेव देवकी के एक एक करके सातबच्चे हुए ओर सातों को जन्म लेते ही कंस ने मार डाला। अब आठवां बच्चा होने वाला था। कारागार में उन पर कड़े पहरे बैठा दिए गए। उसी समय नन्द की पत्नी यशोदा को भी बच्चा होने वाला था। उन्होंने बासुदेव देवकी के दुखी जीवन को देख आठवां बच्चे की रक्षा का उपाय रचा। जिस समय संयोग से यशोदा के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ, जो और कुछ नहीं सिर्फ माया थी। जिस कोठरी में देवकी बासुदेव कैद थे, उसमें अचानक प्रकाश हुआ और उनके सामने शंख, चक्र, गदा, पद्य धारण किए चतुर्भुज भगवान प्रकट हुए। दोनों भगवान के चरणों में गिर पड़े। तब भगवान ने उनसे कहा कि अब मैं पुन: नवजात शिशु का रूप धारण कर लेता हूं। तुम मुझे इसी समय अपने मित्र नंदजी के घर भेज आओ और उनके यहां जो कन्या जन्मी है उसे लाकर कंस के हवाले कर दो। इस समय वातावरण अनुकूल नहीं है। फिर भी तुम चिंता न करो। जागते हुए पहरेदार सो जाएंगे और उफनती अथाह यमुना तुमको पार जाने का मार्ग दे देगी। उसी समय बासुदेव नवजात शिशु रूप श्रीकृष्ण को सूप में रखकर कारागृह से निकल पड़े और अथाह यमुना को पार कर नंदजी के घर पहुंचे बहा उन्होंने नवजात शिशु को यशोदा के साथ सुला दिया और कन्या को लेकर मथुरा आ गए। कारागृह के फाटक पूर्ववत बंद हो गए। अब कंस को सूचना मिली कि बासुदेव देवकी को बच्चा पैदा हुआ है। उसने बंदीगृह में जाकर देवकी के हाथ से नवजात कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटक देना चाहा परंतु बह कन्या आकाश में उड़ गई और बहा से कहा अरे मूर्ख मुझे मारने से क्या लाभ होगा तुझे मारने वाला तो पैदा हो चुका हैं। बह जल्द ही तुझे तेरे पापों का दंड देगा।इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
Saturday, May 30
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