– बलाएं लेकर फौजी पति को दी अंतिम विदाई, 6 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि
भिण्ड, 24 जनवरी। जम्मू के डोडा जिले में सर्चिंग ऑपरेशन के दौरान हादसे में शहीद हुए भिण्ड के भारतीय सेना के फोर आरआर यूनिट के हवलदार शैलेन्द्र सिंह भदौरिया का शनिवार सुबह उनके पैतृक गांव चितावली अटेर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के 6 वर्षीय बेटे भावेश भदौरिया ने पिता को मुखाग्नि दी। इससे पहले जब शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर सलामी दी। डोडा में सेना का वाहन खाई में गिरने से शैलेंद्र सिंह समेत 10 जवान शहीद हुए थे।
शहीद की पत्नी शिवानी ने अंतिम विदाई के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया। पति के पार्थिव शरीर के पास रो रहे लोगों से उन्होंने कहा कि रोना-धोना बंद करो, कुछ नहीं होगा। इसके बाद वह पति के पार्थिव शरीर के पास बैठ गईं और दोनों हाथों से पति के गालों को चूमते हुए बार-बार बलाएं लेती रहीं। एक वीर नारी का यह हौसला देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
उल्लेखनीय है कि जम्मू कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के लिए सैनिकों को ले जा रहा एक बख्तरबंद सैन्य वाहन जिला डोडा स्थित गहरी खाई में गिरने की दुर्घटना में 10 सैनिक शहीद हो गए और लगभग 11 सैनिक घायल हो गए। शहीद सैनिकों में मां भारती की सेवा में जम्मू कश्मीर के डोडा जिले में ड्यूटी के दौरान भिण्ड जिले के निवासी भारतीय सेना की 4 आरआर यूनिट में पदस्थ वीर जवान श्री शैलेन्द्र सिंह भदौरिया वीरगति को प्राप्त हो गए।
ग्राम चितावली में जवान शैलेन्द्र सिंह भदौरिया के पार्थिव देह पर अटेर के पूर्व विधायक मुन्नासिंह भदौरिया, ब्रिगेडियर अमित वर्मा, मेजर अक्षय कुमार, सूबेदार विजय राठौर, चरन सिंह, पवन कुमार, सूबेदार मेजर भूतपूर्व सैनिक अध्यक्ष राकेश सिंह, एसडीएम अटेर शिवांगी अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी एवं ग्रामीण जनों ने पुष्प चक्कर चढ़ाकर सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।
आखिरी कॉल पर कहा था- मुझे डर लग रहा है
शहीद की पत्नी शिवानी ने बताया कि 21 जनवरी की रात उनकी शैलेन्द्र से आखिरी बात हुई थी। उस रात शैलेन्द्र ने एक सपना देखा था। उन्होंने शिवानी को बताया कि मैंने सपने में देखा कि दोनों बेटियों को बहुत पढ़ाया, पैसा खर्च किया, लेकिन वे सफल नहीं हो पाई। घर वाले शादी को लेकर चिंतित हैं और पैसे नहीं बचे हैं। शिवानी ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए कहा था कि चिंता मत करो, हमारे पास प्लॉट है। रिटायरमेंट के बाद उसे बेचकर बेटियों की शादी कर देंगे। इस पर शैलेंद्र ने कहा था- मुझे बहुत डर लग रहा है, कुछ होने वाला है। इसके बाद उनके शहीद होने की खबर आई।
दादा भी 1972 में शहीद हुए थे
शहीद के पिता हनुमत सिंह ने गर्व और नम आंखों से कहा कि मेरे तीन पुत्र हैं और तीनों ही आर्मी में हैं। शैलेन्द्र मेरा दूसरा बेटा था। मुझे अपने बेटे पर गर्व है, जिसने देश की सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। ऐसे शूरवीर बेटे पर मैं कुर्बान हूं। उन्होंने बताया कि उनके पिता (शैलेंद्र के दादा) भी सेना में थे और वर्ष 1972 में शहीद हुए थे। आज मेरा बेटा भी शेर की तरह शहीद हुआ है।
बड़े भाई बोले- फौजी होने पर गर्व
शहीद के बड़े भाई देवसिंह ने बताया कि हम तीन भाई हैं और तीनों ही सेना में रहे हैं। मैं रिटायर हो चुका हूं। उन्होंने कहा कि दुख तो परिवार को होता है, लेकिन एक फौजी होने के नाते गर्व भी है कि भाई ने देश रक्षा में प्राण न्योछावर किए। अंतिम सलामी देने पहुंचे ब्रिगेडियर अमित वर्मा ने कहा कि पूरा आर्मी परिवार शहीद के परिजनों के साथ खड़ा है। परिवार को मिलने वाली सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
बेटे को बिलखता देख रो पड़े लोग
शहीद की अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने फूलों की वर्षा की और शैलेंद्र सिंह भदौरिया अमर रहें के नारे लगाए। शमशान घाट पर हजारों की भीड़ के बीच जब मासूम भावेश ने पिता का पार्थिव शरीर देखा तो वह फूट-फूटकर रोने लगा। मुखाग्नि देने से पहले वह पिता से लिपट गया।
अमर रहें शैलेन्द्र सिंह के नारों से गूंजा चितावली
भारतीय सेना के वीर जवान शहीद शैलेन्द्र सिंह भदौरिया का पार्थिव शरीर शनिवार को जैसे ही तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव चितावली पहुंचा, पूरा क्षेत्र ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद शैलेन्द्र सिंह अमर रहे’ के नारों से गुंजायमान हो उठा। अपने लाडले सपूत के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर आंख नम थी, लेकिन दिल में अपने वीर योद्धा के प्रति गर्व का भाव था।


