भिण्ड, 22 जनवरी। एक ओर जहां गौमाता को पूजनीय मानकर सेवा के दावे किए जाते हैं, वहीं दबोह नगर में जमीनी हकीकत इसके उलट और अत्यंत हृदय विदारक है। वर्तमान में नगर की सड़कों पर घायल और बीमार गौवंश की स्थिति अत्यंत कष्टदायक बनी हुई है। न तो उनके लिए उचित चारे-पानी की व्यवस्था है और न ही घायल गौवंश के उपचार के लिए कोई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। नगर के जागरूक नागरिकों और गौ-सेवकों ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
नागरिकों का कहना है कि जब शासन द्वारा गौवंश के संरक्षण और रख रखाव के लिए विशेष बजट आवंटित किया जाता है, तो फिर उस बजट का धरातल पर उपयोग क्यों नहीं हो रहा। क्या बेजुबानों का अधिकार कागजों तक ही सीमित रह गया है। इस विकट परिस्थिति को देखते हुए नगर के प्रबुद्ध जनों, गौसेवकों और समाजसेवियों से सामूहिक अपील की गई है। गौसेवकों ने निवेदन किया है कि इस पुनीत कार्य के लिए अपनी आवाज बुलंद करें। यदि समय रहते घायल गौवंश के उपचार और खान-पान की व्यवस्था नहीं की गई, तो यह न केवल मानवता पर कलंक होगा बल्कि प्रशासन की संवेदनहीनता को भी उजागर करेगा।
इनका कहना है:
”जो अधिकार और बजट शासन ने गौमाता के लिए तय किया है, उसे नगर परिषद के माध्यम से उन तक जल्द पहुंचाया जाए, अन्यथा की स्तिथि में हमे आंदोलन करने को विवश होना पड़ेगा।ÓÓ
संतोष चौहान, गौरक्षक लहार


