भिण्ड, 21 जनवरी। आलमपुर नगर सहित सैकड़ों गांवों के किसानों की जीवनधारा कही जाने वाली सोनभद्रिका नदी का अस्तित्व अब धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। दतिया जिले के जुझारपुर इलाके से निकलने वाली इस नदी को तट के किनारे बसे लोगों की आजीविका का साधन माना जाता था। वर्तमान में मानव आपदा के कारण नदी में भारी प्रदूषण फैला हुआ है, जो नदी की जलधारा को खत्म करता जा रहा है।
गौरतलब है कि 20 साल पहले लोग सोनभद्रिका नदी का पानी जहां सिंचाई के लिए उपयोग में लाते थे और लोग नदी के पानी को पीते भी थे। लेकिन नगर परिषद की अनदेखी व सिंचाई विभाग की अनियमितता के कारण नदी का अस्तित्व पूरी तरह से खत्म होता जा रहा है। आलमपुर निवासी वयोवृद्ध गिरिजाशंकर तिवारी, निहाल दाऊ और नारायणदास आर्य बताते हैं कि पूर्व में इस नदी में साफ-सुथरा पानी बहता था, जो लोगों के लिए अमृत के समान था। लेकिन अब नदी में नगर के गंदे नालों को छोड़ दिया गया है। जिससे न केवल नदी प्रदूषित हुई है, बल्कि नगर का वातावरण भी दूषित होता जा रहा है। लोगों का कहना है कि नदी के संरक्षण के लिये अगर जल्द ही कुछ सख्त कदम नहीं उठाए गए तो नदी का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।
नदी में गिर रहा 4 नालों का गंदा पानी
नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने आश्वासन तो दिया, लेकिन नदी के जीर्णोद्धार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। नगर की हरिजन बस्ती, भैरव नगर, छतरी बाग और वार्ड 6 से निकलने वाले नाले नदी में छोड़े जा रहे हैं। जिससे अब नदी सिर्फ नाला बनकर रह गई है। नदी में चारों तरफ फैली गंदगी को साफ करने के लिए समाजसेवियों और स्थानीय लोगों ने समय-समय पर राजनैतिक लोगों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है। लेकिन नदी में सफाई के लिये आज तक कोई अभियान शुरू नहीं किया गया।
नदी की जमीन पर कब्जा कर खेती कर रहे हैं लोग
सोनभद्रिका नदी का पानी बिल्कुल कम रह जाने के कारण आलमपुर समेत नदी किनारे बसे अन्य गांवों के अधिकांश किसानों ने नदी किनारे की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। वे लोग उस जमीन पर लंबे समय से खेती करते आ रहे हैं। वहीं कुछ किसानों ने तो नदी की जमीन को अपने खेतों में मिला लिया है। इस बात की जानकारी प्रशासन और नगर परिषद अधिकारियों को होने के बाद भी उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
आठ साल से नहीं हुई नदी की सफाई
आलमपुर निवासी मलखान कौरव, रंगीलाल माहौर एवं भगवत गुप्ता बताते हैं कि नगर परिषद द्वारा पिछले आठ साल से नदी की सफाई नहीं कराई गई है और न ही नदी में नाले और कचरा डालने पर भी रोक नहीं लगाई गई। जिसकी वजह से आज नदी नाले में तब्दील हो चुकी है और उसके चारों तरफ गंदगी दिखाई देती है। एक समय नदी को नगर की सुंदरता का प्रतीक माना जाता था, जो वर्तमान में महज एक नाला बनकर रह गई है। जिसके खत्म होते अस्तित्व को संवारने के लिये कोई राजनैतिक प्रतिनिधि या शासन व प्रशासन का अधिकारी सामने नहीं आया है।
नालों का पानी रोकना होगा
नगर के युवा संजू कौरव, कलीम खान, राहुल तिवारी, पुष्पेन्द्र भदौरिया का कहना है कि नगर में हर किसी की मांग है कि नदी के समाप्त हो रहे अस्तित्व को बचाया जाए। अगर नदी का अस्तित्व बचाना है तो नगर परिषद को नदी की पूरी तरह से सफाई करनी होगी। इसके साथ ही नगर से नदी में खुले सभी नालों पर रोक लगाकर पाइप लाइनों के जरिए गंदे पानी को नगर के बाहर निकालना होगा।
इनका कहना है:
”जल्द ही नदी का निरीक्षण कर उसके किनारों से अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई की जाएगी।ÓÓ
दीपक शुक्ला, तहसीलदार लहार


