– छह फर्जी हथियार लाइसेंस धारियों पर एफआईआर, पते भी निकले फर्जी, जांच के लिए कई टीमें गठित
भिण्ड, 12 जनवरी। जिले में फर्जी हथियार लाइसेंस के गंभीर मामले ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सामने आते ही पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हथियार लाइसेंस जारी किए गए, जिनका रिकार्ड आधिकारिक फाइलों में मौजूद ही नहीं है।
आर्म्स शाखा के प्रभारी राहुल सिंह भदौरिया की शिकायत पर देहात थाना पुलिस ने छह फर्जी हथियार लाइसेंस धारकों के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया है। आरोपियों में अजीत सिंह, गौरव भदौरिया, हेमंत राजेन्द्र देवरे, राहुल दौलत पाटिल, जावेद अनवर और मोहम्मद राशिद शामिल हैं। जिसमें दो महारष्ट्र के रहने बाले है। इन सभी पर फर्जी तरीके से हथियार लाइसेंस बनवाने और नियमों का उल्लंघन कर धोखाधड़ी का आरोप है।
सत्यापन में चौंकाने वाला खुलासा
जब पुलिस ने आरोपियों के पते का सत्यापन किया, तो जांच और पेचीदा हो गई। पुलिस टीम जब दर्ज पतों पर पहुंची, तो वहां कोई भी संबंधित व्यक्ति नहीं मिला। कई पते पूरी तरह फर्जी निकले। इससे साफ हो गया कि सिर्फ लाइसेंस ही नहीं, बल्कि पहचान और पते भी जानबूझकर गलत दर्शाए गए थे। पते फर्जी मिलने से यह आशंका और गहरी हो गई है कि यह एक संगठित गिरोह का काम हो सकता है।
कई संदेही हिरासत में, पूछताछ जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कई संदेही लोगों को हिरासत में लिया है। उनसे अलग-अलग स्तर पर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी लाइसेंस बनवाने में दलालों, कर्मचारियों या किसी बाहरी नेटवर्क की क्या भूमिका रही। यह भी जांच की जा रही है कि इन लाइसेंसों के आधार पर हथियार खरीदे गए या नहीं।
डीआईजी-एसपी ने बनाई विशेष टीमें
प्रकरण के तूल पकड़ने के बाद डीआईजी और एसपी ने अलग-अलग जांच टीमें गठित की हैं। ये टीमें फर्जी लाइसेंस, संबंधित दस्तावेज, हथियारों की खरीद-फरोख्त और रिकार्ड में हुई संभावित छेड़छाड़ की जांच कर रही हैं। वरिष्ठ अधिकारी लगातार जांच की निगरानी कर रहे हैं और किसी भी स्तर की लापरवाही पर कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।
कलेक्टर ने बनाई जांच समिति
कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने भी मामले को गंभीर मानते हुए आर्म्स रिकार्ड की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। यह समिति आर्म्स शाखा के रिकार्ड, लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया, नियमों के पालन और रिकार्ड में किसी तरह की गड़बड़ी या छेड़छाड़ की जांच करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बढ़ सकती है कार्रवाई की जद
सूत्रों के अनुसार, यह मामला सिर्फ छह लाइसेंस धारकों तक सीमित नहीं हो सकता। जांच में और नाम सामने आने की संभावना है। यदि आर्म्स शाखा या अन्य विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। फर्जी हथियार लाइसेंस का यह मामला जिले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।


