– जिया टेलेंट युनिवर्स में उमड़ा साहित्य का सैलाव, हास्य और व्यंग्य की फुहारों के बीच थमी रही ठंड
भिण्ड, 04 जनवरी। साहित्य जब समाज का दर्पण बनता है, तो शब्द मशाल बन जाते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा बीती रात जिया टेलेंट युनिवर्स स्कूल के प्रांगण में देखने को मिला। जहां पर वार्षिकोत्सव के दौरान देश के दिग्गज रचनाकारों ने अपनी लेखनी से जज्बातों का ऐसा ताना-बाना बुना कि कड़ाके की ठंड भी श्रोताओं के उत्साह को कम नहीं कर पाई।
दबोह नगर में आयोजित कवि सम्मेलन में साहित्य जगत के दिग्गजों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें जाने माने कवि राष्ट्रपति सम्मानित ख्यातिप्राप्त साहित्यकार डॉ. सुनील त्रिपाठी ‘निरालाÓ, कवियत्री डॉ. मुक्ता सिकरवार (आगरा), राजीव सक्सेना ग्वालियर प्रख्यात हास्य कलाकार, जितेंद्र अमित ग्वालियर हास्य रस, सत्येंद्र सिंह बबेड़ी भिण्ड एवं राजेश तोमर ‘दोषीÓ मुरैना, अमित त्रिपाठी मौजूद रहे। कार्यक्रम के केन्द्र बिंदु रहे राष्ट्रपति सम्मानित डॉ. सुनील त्रिपाठी ‘निरालाÓ ने जब अपनी चिर-परिचित शैली में ‘सरपंच की चौपाल और जाल में फंसी मछलीÓ का जिक्र किया, तो पूरा पाण्डाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी रचनाओं ने राजनीति और समाज के दोहरे चरित्र को बखूबी उजागर किया।
ग्वालियर के राजीव सक्सेना ने व्यंग्य के बाण छोड़ते हुए ‘चापलूसों की भीड़Ó और ‘खुद्दारीÓ पर जो पंक्तियां पढ़ीं, उसने वर्तमान दौर की कड़वी सच्चाई को सामने रख दिया। वहीं जितेन्द्र अमित ने नई पीढ़ी को संस्कारों का पाठ पढ़ाते हुए स्पष्ट किया कि माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ी इबादत है। मुरैना से आए राजेश तोमर ‘दोषीÓ की कविताओं में चंबल की माटी की सोंधी खुशबू और बेबाकी साफ झलकी। कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह था जब सत्येंद्र सिंह बबेड़ी ने ‘मांÓ पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। शब्दों का प्रभाव ऐसा था कि कई श्रोताओं की आंखे नम हो गई।
आगरा की प्रख्यात कवयित्री डॉ. मुक्ता सिकरवार ने अपनी ओजस्वी वाणी से प्रेम और हसरतों को नया आयाम दिया। उनकी रचना ‘दिल की बातों को सरेआम बताया न करोÓ युवाओं के बीच विशेष चर्चा का विषय रही। कार्यक्रम के अंत में अमित त्रिपाठी ने आज के ‘डिजिटल युगÓ की विडंबना पर प्रहार करते हुए बच्चों के हाथ में बढ़ते मोबाइल के खतरों के प्रति समाज को आगाह किया। आमतौर पर सर्द रातों में सन्नाटा पसर जाता है, लेकिन यहां नजारा अलग था। लोग अपनी कुर्सियों पर जमे रहे और हर शेर, हर मुक्तक पर ‘वाह-वाहÓ और ‘दोबाराÓ की गूंज सुनाई देती रही। विद्यालय प्रबंधन की इस पहल ने नगर को एक यादगार साहित्यिक रात तोहफे में दी। साहित्य की इस गरिमामयी सभा में विद्यालय के संचालक डॉ. शहनवाज खान ने अपनी टीम के साथ अतिथियों का सत्कार किया। हरिश्चंद्र पाण्डेय, अजय त्रिपाठी और अर्पित गुप्ता ने कवियों को साहित्य का प्रहरी बताते हुए उन्हें विधालय की ओर से शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।


