भिण्ड / मौ 25 दिसम्बर मनीष दुबे
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हो रही हिंसा किसी भी सूरत में बर्दाश्त के काबिल नहीं है।
मानवता ईश्वर के लिए कल्याण संस्था परिषद के अध्यक्ष अब्दुल हमीद ने इस विषय पर कड़ा रुख़ अपनाते हुए कहा कि जुल्म चाहे दुनिया के किसी भी कोने में हो, उसकी निंदा करना हमारा नैतिक और मानवीय दायित्व है। अन्याय को कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता—चाहे वह फ़िलिस्तीन के मासूम बच्चों पर हो, बांग्लादेश के हिंदुओं पर हो, या फिर दुनिया के किसी भी हिस्से में किसी भी समुदाय के साथ किया जा रहा हो।उन्होंने कहा कि जब जुल्म को जाति और धर्म के आधार पर अंजाम दिया जाता है, तो वह और भी घिनौनी और खतरनाक मानसिकता को उजागर करता है। ऐसी सोच समाज को तोड़ती है, इंसानियत को शर्मसार करती है और मानव सभ्यता के अस्तित्व पर सवाल खड़े करती है।
आगे अब्दुल हमीद ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग और दुनिया के वे तमाम संगठन, जो मानवता और मानवाधिकारों की रक्षा का दावा करते हैं, आज अपनी चुप्पी के कारण पूरी दुनिया के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। जब निर्दोषों पर जुल्म होता है और तथाकथित मानवाधिकार संस्थाएं खामोश रहती हैं, तो यह खामोशी भी जुल्म में भागीदारी बन जाती है।
उन्होंने कहा कि अगर मानवाधिकार केवल काग़ज़ों, रिपोर्टों और मंचों तक सीमित रह जाएं और ज़मीनी स्तर पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ़ ठोस आवाज़ न उठे, तो ऐसे संगठनों की भूमिका और नीयत दोनों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आज दुनिया को दिखावटी संवेदनाओं नहीं, बल्कि निष्पक्ष, साहसी और ईमानदार हस्तक्षेप की ज़रूरत है।
अब्दुल हमीद ने ज़ोर देकर कहा कि हमें नफरत फैलाने वाली इस मानसिकता से न केवल अपने समाज और देश को बचाना है, बल्कि पूरी दुनिया को भी सुरक्षित करना है। क्योंकि यह संपूर्ण संसार और इसमें बसने वाला हर इंसान “वसुधैव कुटुम्बकम” के सिद्धांत के अनुसार हमारा परिवार है, और किसी भी परिवार में ऐसे लोगों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए जो किसी भी रूप में जुल्म को अपना हथियार बनाते हैं।


