– दौड़ रहे कागजी घोड़े, पर काम होता नहीं दिख रहा
भिण्ड, 17 दिसम्बर। आलमपुर नगर की जीवन दायिनी कहीं जाने वाली सोनभद्रिका में नाले नालियों का गंदा पानी नहीं जाए। इसी उद्देश्य को लेकर नगर परिषद कार्यालय द्वारा पिछले करीब दो साल से कार्ययोजना बनाई जा रही है। और नदी का अस्तित्व बचाने के लिए कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। लेकिन धरातल पर कोई काम होता नहीं दिखाई दे रहा है।
आलमपुर से निकली सोनभद्रिका नदी में बस्ती में बने छोटे बड़े नाले नालियों का गन्दा पानी पहुंचने से नदी का पानी दूषित हो चुका है। यहां तक कि नदी में कई जगह कूड़ा कचरा एवं मलबा जमा हो गया है और मलवे पर कई प्रकार के पेड़ पौधे और खरपतवार ऊंग आया हैं। जो नदी के जल प्रवाह को रोक रहे हैं। इसके अलावा सोनभद्रिका नदी में मौजूद जल स्त्रोत बन्द हो गए हैं। नदी में विचरण करने वाले विभिन्न प्रकार के जलीय जीव विलुप्त हो गए हैं। सोनभद्रिका नदी का पानी इतना दूषित हो गया है कि नदी में स्नान करना तो दूर पशु भी पानी नहीं पीते हैं। नदी के पानी से यदि कोई व्यक्ति स्नान करले तो उसको खुजली एवं फोड़ा फुंसी हो जाते हैं।
नगर परिषद सहित आलमपुर के नागरिक सोनभद्रिका नदी की तीन चार बार साफ सफाई कर चुके हैं। लेकिन नदी में नाले नालियों का गंदा पानी पहुंचने के कारण कुछ ही दिनों नदी में कई जगह कचरा एवं मलबा जमा हो जाता है। जब तक नाले नालियों के माध्यम से नदी में जाने वाले गंदे पानी के रोकथाम के प्रबंध नहीं किए जाएंगे तब तक सोनभद्रिका नदी के स्वरूप में परिवर्तन आना मुश्किल है। आलमपुर के लोगों द्वारा शासन प्रशासन से सोनभद्रिका नदी में जाने वाले गन्दे पानी को रोकने और नदी का अस्तित्व बचाने की काफी लम्बे समय से मांग की जा रही है। लेकिन सोनभद्रिका नदी का अस्तित्व बचाने के लिए शासन-प्रशासन बिलकुल भी गंभीर नजर नहीं आ रहा है।
नदी किनारे की भूमि पर लोगों ने किया अतिक्रमण
आलमपुर से निकली सोनभद्रिका नदी के किनारे सरकारी जमीन पर कई लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है, जिससे नदी सिकुड़ गई है। लोग बताते हैं कि खिरिया घाट से लेकर रजरापुरा तक नदी के किनारे दोनों ओर सरकारी भूमि पर जबरदस्त तरीके से अतिक्रमण हुआ है। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।


